बेकरिया थाना क्षेत्र के गोगुंदा-पिंडवाड़ा हाइवे पर उंखलियात टनल के निकट शुक्रवार शाम सेना के एक ट्रक में अचानक आग लग गई। ट्रक में रखी सामग्री से ट्रक पूरी तरह से जलकर खाक हो गया। ट्रक में बैठे 6-7 जवानों ने कूदकर जान बचाई। हादसे को लेकर हाइवे रोक दिया गया, जिससे 30-30 किलोमीटर तक वाहनों की कतारें लग गई। मामले को लेकर सेना की आंतरिक जांच का आदेश दिया गया है।
जानकारी के अनुसार शुक्रवार शाम सेना के 5 वाहनों का काफिला जोधपुर से रवाना हुआ था। वाहन गोगुंदा-पिंडवाड़ा हाइवे से होते हुए उदयपुर पहुंच रहे थे। बेकरिया थाना क्षेत्र के सेमला थला गांव के पास एक ट्रक अचानक गर्म हो गया। ऐसे में काफिले के सभी वाहन कुछ देर के लिए रुक गए। कुछ देर बाद काफिला आगे बढ़ा ही था और 10 किलोमीटर आगे चलने के बाद ही उंखलियात सुरंग के पास थामलावरी में ट्रक ने आग पकड़ ली। धमाके के साथ ट्रक आग के गोले में तब्दील हो गया। ट्रक में सवार 6-7 जवान ट्रक से कूद गए और तुरंत ही हरकत में आ गए।
सेना की क्विक रिस्पॉन्स टीम क्यूआरटी और उच्चाधिकारी भी मौके पर पहुंचे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ट्रक में आग लगने पर रह-रहकर धमाके भी सुनाई दिए।
थम गया हाइवे
गोगुंदा-पिंडवाड़ा हाइवे पर हादसे के बाद मार्ग रोक दिया गया। ऐसे में दोनों ओर वाहनों की लम्बी कतारें लग गई। बेकरिया पुलिस, 108 एम्बुलेंस और हाइवे टीम मौके पर पहुंची। हाइवे और पुलिस ने वाहनों को गोगुन्दा टोल नाके पर ही रोक दिया। इस दौरान तीन घण्टे मार्ग बाधित रहा। फिर वाहनों को वन-वे से शुरू करवाया।
तीन घंटे बाद बुझी आग
उदयपुर से दमकल भी पहुंची, लेकिन लगातार भीषण आग बनी रहने से दमकल गाडिय़ां नजदीक नही जा सकी। दमकल की गाडिय़ों ने तीन घण्टे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। इस दौरान मौके पर दहशत का माहौल बना रहा। हादसे की गंभीरता के चलते ग्रामीणों की भी भारी भीड़ जमा रही।
ये है सेना का अधिकृत बयान
सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल अमिताभ शर्मा ने बताया कि पांच वाहनों का काफिला उदयपुर सैन्य स्टेशन की ओर जा रहा था। उदयपुर से 60 किमी दूर गोंडा में शाम 6.30 बजे एक वाहन में तकनीकी खराबी आ गई, जिससे उसमें आग लग गई। आग देखते ही सेना की क्विक रिएक्शन टीम हरकत में आई और जलते हुए ट्रक को तुरंत घेर लिया और हाइवे पर यातायात रोक दिया। किसी भी तरह के कर्मियों, सेना या नागरिकों के जीवन का नुकसान नहीं हुआ। सेना के जवानों की त्वरित प्रतिक्रिया ने यह भी सुनिश्चित किया कि सार्वजनिक संपत्ति या सड़क पर चलने वाले निजी वाहनों को कोई नुकसान न हो। नागरिक प्रशासन ने भी सड़क पर यातायात प्रबंधन के लिए अपने संसाधनों से सहायता की है। मामले के तथ्यों का पता लगाने के लिए सेना की ओर से एक आंतरिक जांच का आदेश दिया गया है।