शिकायतों का समाधान होगा जल्द, कमियों पर मिलने वाले मुआवजे की राशि होगी ज्यादा
उदयपुर. प्रदेश के सरकारी महकमों में आधुनिकीकरण और शहरों के स्मार्ट होने के साथ ही बिजली प्रबंधन भी स्मार्ट होने जा रहा है। ऐसे में जहां बिजली संबंधी शिकायतों का समाधान भी जल्द होगा, वहीं जिस परिस्थिति में मुआवजा मिलता है, वह भी अधिक मिलेगा। प्रावधानों में विभिन्न स्तरों पर अधिकार और सीमाएं बढ़ाई जा रही है, जिससे उपभोक्ताओं को निगम मुख्यालय तक जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग ने इसके लिए विनियम-2020 का प्रारूप जारी किया है।
राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग ने प्रदेश के विद्युत वितरण निगमों में उपभोक्ताओं की शिकायतों के शीघ्र निवारण के लिए विद्युत लोकपाल के गठन, कार्यप्रणाली व अवधि में सुधार की तैयारी की है। आयोग में उपभोक्ता पक्ष पोषण के लिए उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम (आरइआरसी), विद्युत लोकपाल व उपभोक्ता पक्ष पोषण विनियम का प्रारूप जारी किया है।
ये प्रावधान भी किए
- लाइसेंसी की वेबपोर्टल पर एक लिंक पर शिकायत पंजीकरण, ट्रेकिंग हो सकेगी तथा लोकपाल के यहां भी ई-मेल के माध्यम से भी शिकायत भेजी जा सकेगी।
- आंतरिक शिकायत निवारण के लिए प्रकोष्ठ और कार्य क्षेत्र। आपूर्ति गुणवत्ता, सेवा दोष, दक्षता मापदंडों के लिए सामान्य शिकायतें।
- एलटी आपूर्ति की खंड (अधिशासी अभियंता) स्तर। एचटी आपूर्ति की वृत्त (अधीक्षण अभियंता) स्तर पर शिकायतें सुनी जाएंगी।
इस प्रकार बढ़ी वसूली संबंधी शिकायतों की सीमा
- उपखंड (एइएन) स्तर पर 10 हजार से बढ़ाकर 20 हजार रुपए
- खंड (एक्सइएन) स्तर पर 25 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपए
- वृत्त (एसई) स्तर पर 3 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपए
पांच दिन में उपभोक्ता को जवाब
- संभाग मुख्यालय स्तर पर एक पूर्ण कालिक तीन सदस्यीय फोरम गठित होगा, जिसमें अध्यक्ष मुख्य अभियंता, वित्तीय सदस्य संभागीय वरिष्ठ लेखाधिकारी तथा एक सदस्य आयोग की ओर से मनोनीत होगा।
- फोरम लॉ टेंशन व हाई टेंशन लाइन के उपभोक्ताओं की सामान्य विद्युत सेवा तथा बिजली बिल, बकाया और वसूली आदि से संबंधित 5 लाख तक की शिकायतों की सुनवाई कर सकेंगे।
- निगम स्तरीय तीन सदस्यीय फोरम में अध्यक्ष निगम का प्रबंध निदेशक, वित्तीय सदस्य निगम का मुख्य लेखा अधिकारी तथा एक सदस्य आयोग की ओर से सेवानिवृत्त अपर जिला न्यायाधीश स्तर का होगा।
शिकायत निवारण समय आधा
फोरम शिकायत प्राप्ति के बाद निर्धारित प्रक्रिया से 45 दिन में निवारण करेगा। शिकायत का समय पर निवारण नहीं होने पर अगले स्तर के फोरम व विद्युत लोकपाल की ओर से शिकायत सुनी जाएगी। विद्युत लोकपाल की ओर से 90 दिन के बजाय 45 दिन में आदेश होगा।
मिलेगी विधिक सहायता
आयोग की ओर से उपभोक्ता पक्ष पोषण प्रकोष्ठ गठित होगा, जो शिकायतकर्ताओं को प्रकरण प्रस्तुति में विधिक सहायता भी देगा। इसके लिए उपभोक्ता मामलात में कार्यरत संगठनों, वकीलों की सहायता ली जाएगी। प्रकोष्ठ फोरम व लोकपाल की ओर से निवारित प्रकरणों की अद्र्ध वार्षिक समीक्षा करेगा।
भेज सकते हैं टिप्पणी
राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग ने इसके लिए विनियम-2020 का प्रारूप जारी किया है। यह लागू होना आमजन के लिए काफी सुविधाजनक होगा। निगमकर्मियों की जवाबदेही बढ़ेगी। इसके लिए विशेषज्ञों से राय और आपत्तियां मांगी गई है। प्रदेशभर से विशेषज्ञों ने कमेंट भेजे हैं। आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध इस प्रारूप पर मंगलवार तक टिप्पणी भेज सकते हैं।
येवंती कुमार बोलिया, रिटायर्ड इंजीनियर, उदयपुर