
उदयपुर. कैलाशपुरी स्थित प्रसिद्ध बाघेला तालाब धीरे-धीरे अतिक्रमियों की भेंट चढ़ रहा है। तालाब पेटे में जगह-जगह लोगों ने निर्माण कर या मिट्टी डालकर इसकी भराव क्षमता को कम कर दिया है। प्रभावशाली लोगों ने पेटे में चारदीवारी बनाकर भराव भर दिया है। वर्तमान में एक व्यक्ति सूखे पेटे में दिन-रात काम चलाते हुए पत्थरकोट खड़ी करवा रहा है। लोगों ने उसे कई बार रोका-टोका लेकिन उसने काम जारी रखा। ग्रामीणों की शिकायत पर प्रशासन ने एक बार तो काम रुकवा दिया लेकिन तालाब पेटे में पत्थरकोट अब भी खड़ी है। अन्य प्रभावशाली लोग अब भी तालाब पर कब्जे में लगे हुए है।
इनको भी फायदा
बाघेला तालाब के ओवरफ्लो होने पर पानी बप्पा रावल बांध से होते हुए राजसमंद के देलवाड़ा के पलेरा तालाब में जाता है। वहां से मांगथला होते हुए पानी मावली के गंधर्व सागर में जाता है। इस पानी की आवक से मावली, खेमली, घासा, देलवाड़ा, कैलाशपुरी के आसपास एरिये में सिंचाई के साथ ही नलकूप, कुएं आदि रिचार्ज होते हैं।
जमीन की ऊंची
तालाब किनारे काश्त भूमि वाले कई खातेदारों ने तालाब पेटे में मिट्टी डालकर तालाब की भराव क्षमता कम कर दी। ऐसे खातेदार भी है जो तालाब सूखने पर पुरानी चारदीवारी गिराकर तालाब में घुस गए। तालाब में मोटर लगाकर सिंचाई कर रहे हैं।
शिकायत दरकिनार
तालाब पेटे में अतिक्रमण पर स्थानीय लोगों ने इसकी कई बार शिकायत जिम्मेदारों से की, लेकिन प्रशासन स्तर पर अतिक्रमण हटाने पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया।
मदार बड़ा तालाब पर एक नजर
15-25 फीट तालाब की गहराई
24.8 हेक्टेयर है तालाब का क्षेत्रफल
4-5 बड़े अतिक्रमण पेटा क्षेत्र में
बाघेला के तालाब का कैचमेंट एरिया
- झालों को गुड़ा
- चीरवा की पहाडिय़ा
- कैलाशपुरी की पहाडिय़ा
- समीपवर्ती इलाकों से आता है बरसाती पानी।
Published on:
10 Jun 2019 07:13 pm
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