
उदयपुर . शहर के मंदिरों में मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर रविवार को छप्पन भोग धराए गए। विशेष मनोरथ पर भगवान के दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। मंदिरों में पूरे दिन भजन-कीर्तनों का दौर चला। दूसरी ओर, देवस्थान विभाग के अधीन पुष्टिमार्गीय मंदिरों में छप्पनभोग के नाम पर औपचारिकता की गई।
जगदीश मंदिर में दिनभर विशेष अनुष्ठान हुए। इसके तहत सुबह 5.30 बजे मंगला की झांकी के साथ ही ठाकुरजी का पंचामृत स्नान किया गया। प्रभु को सफेद जरी मखमल की पोशाक धराई गई। दिनभर कीर्तन हुए। शाम को 5.45 बजे छप्पनभोग के दर्शन हुए। प्रभु के समक्ष सभा कक्ष में विविध प्रकार की मिठाइयां, मठडिय़ा, लड्डू सहित कई व्यंजन भोग लगाए गए। इस दौरान मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन भी हुए। देर रात तक दर्शन करने के लिए भक्तों की खासी भीड़ उमड़ी। पुजारी हुकुम राज और रामगोपाल ने बताया कि अंत में श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। श्रीनाथजी मंदिर के अधिकारी कैलाशचंद्र पुरोहित ने बताया कि छप्पन भोग के तहत मंदिर में विशेष दर्शन हुए। उन्होंने बताया कि दोपहर में ठाकुरजी को विविध प्रकार के व्यंजन भोग धराए गए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में वैष्णवजनों ने दर्शन लाभ लिया।
जाड़ रहे पल्ला
देवस्थान विभाग के अधीन मंदिरों में विशेष उत्सवों के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय है। इनमें से कुछ कर्मचारी संविदा पर लगे हैं। इन सबकी जिम्मेदारी है कि वे विशेष उत्सवों के दौरान मंदिरों की जांच करें, लेकिन रविवार को छप्पन भोग का मनोरथ होने के बावजूद एक भी कर्मचारी मंदिरों में नहीं गया।
मैं अवकाश पर हूं
मंदिर प्रभारी रामसिंह से जब पूछा गया कि मंदिरों में छप्पन भोग के तहत कितने प्रकार के भोग धराए गए तो उन्होंने कहा मैं अवकाश पर हूं। अन्य कर्मचारी इसकी जिम्मेदारी देख रहे हैं।
लिस्ट बाल भोगियों के पास
इंस्पेक्टर एसएन पंड्या से जब भोग के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि लिस्ट बालभोगियों को दी हुई है। उनसे जब पूछा कि मंदिरों में कौन अधिकारी गया तो उन्होंने कहा आज रविवार होने के चलते वे नहीं गए। कल जाकर देखूंगा कि क्या किया।
Published on:
04 Dec 2017 03:19 pm
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