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फिर सियासी सुर्खियों में लौटे गरासिया बोले, पार्टी मेेरी ÒमांÓ

सक्रिय राजनीति के लिए 1993 के बाद नहीं मिला था कोई टिकट, पार्टी ने तीस साल बाद दिय मौका

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Chunni lal Garasia

राजस्थान से भाजपा (BJP) के राज्यसभा (Rajyasabha) उम्मीदवारों में शामिल प्रदेश उपाध्यक्ष चुन्नीलाल गरासिया (Chunni lal Garasiya) ने कहा कि पार्टी ने जो भरोसा जताया है, उस पर खरा उतरते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ताकत बनकर काम करुंगा। उन्होंने कहा पार्टी मेरी मां है, इसके लिए समर्पित भाव से काम करते हुए देश सेवा में पीछे नहीं हटूंगा। लंबे समय से राजनीतिक अवसान में चल रहे गरासिया के लिए इसे राजनीति में दूसरी पारी माना जा रहा है। वे काफी समय से पार्टी संगठन में तो सक्रिय हैं, लेकिन विधानसभा व लोकसभा चुनाव के लिए उन्हें लम्बे समय से टिकट नहीं मिल रहा था।

गरासिया ने पत्रिका से बातचीत में कहा कि वे सामान्य कार्यकर्ता की तरह ही सबके साथ मिलकर पार्टी की रीति नीति को आगे बढ़ाते हुए सभी के सहयोग से काम करेंगे। वे डूंगरपुर जिले के गलियाकोट कस्बे के छोटे से गांव उबली के रहने वाले हैं, जो मानगढ़ के बिल्कुल पास है। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही मानगढ़ राष्ट्रीय धरोहर के रूप में जाना जाएगा। मुझे खुशी है कि मैंने भैरोंसिंह शेखावत सरकार के समय पहली बार मानगढ़ के इतिहास को आगे बढ़ाया।

पहले ही चुनाव में बन गए थे मंत्री

गरासिया वर्ष 1973 में पढ़ाई के लिए गांव से उदयपुर आए थे। यहां विद्यार्थी परिषद व युवा मोर्चा में सक्रिय रहे। वर्ष 1990 में वे पहली बाद उदयपुर ग्रामीण से चुनाव लड़े और जीतने पर भैरोंसिंह सरकार (Bheron Singh Shekhawat) के समय उन्हें पीडब्ल्यूडी, चिकित्सा एवं जनजाति विकास राज्यमंत्री बनाया। मंत्री रहते हुए कारसेवा में अयोध्या जाने से मना करने पर वे त्यागपत्र देकर चले गए। वर्ष 1993 में फिर से चुनाव होने पर वे जीते, लेकिन उन्हें मंत्री के बजाए एसटी मोर्चा का चेयरमैन बनाया गया। उसके बाद उन्हें टिकट नहीं मिला। वर्ष 2003 में वसुन्धरा सरकार (Vasundhra Raje Govt.) में उन्हें एससी एसटी आयोग का चेयरमैन बनाते हुए राज्यमंत्री का दर्जा दिया। प्रदेश कार्यकारिणी में अशोक परनामी व मदन सैनी के समय भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष रहे। अभी भी वे प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। इसके अलावा अखिल भारतीय जनजाति मोर्चा के चौथी बार राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं।

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