
उद्योगों और संस्थानों में समन्वय जरूरी: शर्मा
भुवनेश पंड्या
उदयपुर। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय उदयपुर के कुलपति प्रो. उमाशंकर शर्मा ने कहा कि इंजीनियर्स हमारे देश के विकास की रीढ़ हैं और उन्हीं के दम पर देश विकासशील से विकसित देशों की श्रेणी में आ गया है। हमारे इंजीनियरों ने वैमानिकी, अंतरिक्ष, नौसेना, ऊर्जा व अन्य विकास सहित कई क्षेत्रों में मील के पत्थर स्थापित किए हैं। उद्योगों और संस्थानों में ऐसा समन्वय स्थापित किया जाए कि दोनों एक.दूसरे की जरूरतों को पूरा कर सकें। इंडस्ट्री शैक्षणिक संस्थाओं को भरपूर सहयोग देकर अपने लिए विश्व स्तरीय इंजीनियर्स तैयार करवाएं और इंस्टीट्यूशन इंडस्ट्री के सहारे अपनी गुणवत्ता को और अधिक बेहतर बनाएं। शर्मा ने यह विचार रविवार को उदयपुर के निजी रिसोर्ट में तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय 33वीं इंडियन इंजीनियरिंग कांग्रेस के समापन समारोह में व्यक्त किए। मेजर जनरल एस भट्टाचार्यन ने कांग्रेस की संक्षिप्त रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि तीन दिन में 14 तकनकी सत्रों में कुल 112 पेपर प्रस्तुत किए गए। पास्ट प्रेसिडेंट शिशिर कुमार बनर्जी ने नए प्रेेसिडेंट डॉ. टीएम गुनाराजा का स्वागत किया। आयोजन समिति के अध्यक्ष इंजीनियर सोहनसिंह राठौड़, सह अध्यक्ष इंजीनियर अनुरोध प्रशांत शर्मा, आयोजन सचिव इंजीनियर यवंतीकुमार बोलिया, सह सचिव इंजीनियर महेंद्रकुमार माथुर एवं प्रेस सचिव इंजीनियर चंद्रप्रकाश जैन ने बताया कि इस अवसर पर इंजीनियरिंग की विभिन्न विधाओं की वार्षिक रिपोर्ट के अलग-अलग वोल्यूम्स का अतिथियों ने बारी-बारी से अनावरण किया। इससे पूर्व दोपहर के सत्र में दी इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स इंडिया के कॉरपोरेट मेम्बर्स की 99वीं जनरल मीटिंग हुई। इसमें भारत में इंजीनियरिंग की स्थितियों व भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इससे पूर्व वूमन इंजीनियर्स मीट हुई जिसमें देशभर से आयी महिला इंजीनियर्स ने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग के क्षेत्र में काम कर रही महिलाओं को प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ में संतुलन में कई दिक्कतें आती हैं। मातृत्व अवकाश के बाद कई बार जॉब छोडऩे तक की स्थितियां बन जाती हैं। ऐसा प्राइवेट सेक्टर में बहुत ज्यादा देखने को मिलता है। कई बार वे चाह कर भी दोहरी जिम्मेदारियों के चलते एमटेक सहित उच्च शिक्षा हासिल नहीं कर पातीं। ऐसे में उन्हें सरकारी स्तर पर प्रोत्साहन और नौकरी में ज्यादा रियायतों की जरूरत है। महिला एंटरप्रेन्योरशिप को भी बढ़ावा मिलना चाहिए। अध्यक्षता मधुमती मेनारिया ने की। केतकी मुंदड़ा ने कहा कि हम महिला इंजीनियर्स सोशल इंजीनियर्स भी हैं, ऐसे में इंजीनियरिंग से जुड़ी संस्थाओं में हमें कम से कम 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। इस अवसर पर यह प्रस्ताव पारित किया गया कि इंजीनियरिंग कांग्रेस से जुड़े सभी लोकल चेप्टर्स पर 8 मार्च महिला दिवस पर वीमन इंजीनियर्स डे मनाया जाएगा।
Published on:
23 Dec 2018 07:31 pm
बड़ी खबरें
View Allउदयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
