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बच्चों की बीमारियों पर ‘कोरोना भारी,

- राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम- पिछले वर्षों के मुकाबले कोरोनाकाल में कम मिला बच्चों को लाभ  

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बच्चों की बीमारियों पर 'कोरोना भारी,

बच्चों की बीमारियों पर 'कोरोना भारी,

भुवनेश पंड्या

उदयपुर. बच्चों की 38 प्रकार की बीमारियों से निजात दिलाने के लिए सरकार की ओर से चलाए जा रहे आरबीएसके यानी राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का कोरोनाकाल में बच्चों को पूरा फायदा नहीं मिल पाया। पिछले वर्षों से यदि तुलना की जाए तो कोरोना ने बच्चों के स्वास्थ्य पर गहरी चोट की है। पिछले वर्षों में जहां बच्चोंं की स्वास्थ्य जांच का आंकड़ा अधिकतम पांच लाख तक पहुंचा था, वह इस बार केवल 1 लाख 70 हजार बच्चों की जांच तक ही सिमट कर रह गया। सर्जरी जरूर 103 हुई, लेकिन यदि जांच का दायरा बढ़ा होता तो ज्यादा बच्चों को फायदा मिलता।

शिशु मृत्यु व बाल मृत्युदर कम करने के लिए व मिलेनियम डवलपमेंट गोल को प्राप्त करने के लिए राज्य सरकार प्रत्येक बच्चे को स्वास्थ्य सुरक्षा देती है, इसके लिए आरबीएसके प्रोग्राम शुरू किया गया है। इसमें चिह्नित 38 बीमारियों की समय पर पहचान कर उपचार किया जाता है। इसमें बाल विकास के 4 विकार 4 डी- डेफिसिएंसी, डिजीज, डवलपमेंटल डिलेज और डिसेबिलिटीज शामिल किए गए है। प्रत्येक बच्चे की प्रारंभिक स्क्रीनिंग घर व संस्थागत दोनों केन्द्रों पर की जाती है, इसमें प्रदेश के जिलों के प्रत्येक खंड में दो-दो मोबाइल हैल्थ टीम हैं। टीम फील्ड में भ्रमण से वाहन उपलब्ध करवाए जाते हैं, बच्चों की सघन स्क्रीनिंग के लिए जरूरी मेडिकल उपकरण व दवाइयों की किट देकर दी गई है।
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तीन कैटेगरी
- 0-6 सप्ताह के बच्चे : हॉस्पिटलों में जन्म के बाद इनकी स्क्रीनिंग होती है। जन्मजात विकारों की पहचान कर घर पर मेडिकल टीम विजिट कर विकारों के उपचार की जांच परख कर तैयारी करती है।

- 6 सप्ताह से 6 वर्ष - इनकी स्क्रीनिंग आंगनबाड़ी केन्द्रों पर होती है।
- 6 वर्ष से 18 वर्ष- इनकी स्क्रीनिंग स्कूलों में होती है। माइक्रोप्लान तैयार कर जांच की जाती है, जांच में हर बच्चे का रेफरल व स्क्रीनिंग कार्ड बनाया जाता है। यदि बच्चा बीमारी से ग्रस्त है, तो उसे उपचार के लिए रेफर किया जाता है। इन बच्चों का आगे के उपचार ब्लॉक, सीएचसी स्तर पर शिविर लगाकर विशेषज्ञ चिकित्सकों के माध्यम से करवाया जाता है। वहां उपचार संभव नहीं होने पर जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज या निजी अस्पतालां में नि:शुल्क उपचार करवाया जाता है।

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वर्षवार बच्चों की संख्या व उपचार

विवरण- 2015-16/16-17/17-18/18-19/19-20/20-21
बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण-336321-391434-391556-510868-410731-170235

बच्चे रोगी चिह्नित पाए गए- 6429-13639-25208-30975-23326-9803
बच्चों का उपचार हुआ- 3529-11158-20164-21840-12354-8319

शिविरों का आयोजन किया- 26- 32-65- 44-35-20
सर्जरी- 87-160-159-99-110-103

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विवरण- 2015-16/16-17/17-18/18-19/19-20/20-21

हियरिंग एड- 0-32-33- 32- 16- 0
चश्में - 0- 32-50-143- 0-0

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बीमारियों का विवरण व सर्जरी 2015 से 2021 तक

बीमारी- सर्जरी
सीएचडी- 173-हृदय की बीमारी

सीएलपी- 165- चेहरे की विकृति
क्लब फूट- 108- पांव की विकृति

कोनजेनिटल कांटे्रक्ट- 89- जन्मदोष
डीडीएच- 28-

ओटिस्टिस मीडिया- 57 बहरापन
टंग टाई- 09- कटी हुई जीभ व बोलने में परेशानी

न्यूरल ट्यूब डिफैक्ट- 15- रीढ़ की हड्डी व अन्य अंगों के विकृति
अन्य सर्जरी- 154

कुल- 798
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आंकड़ों में स्थिति
लगाए गए शिविर 2015-21

कुल आरबीएसके शिविर- 155
कुल मोबाइल डेंटल वेन शिविर- 92

कुल वितरित चश्में- 199
कुल बांटे गए हियरिंग एड- 97

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अब ये काम सरकार ने जिला चिकित्सालय यानी हमें सौंप दिया है। हमने इसे लेकर शनिवार को ही बैठक कर ली है, जिन बच्चों को कोरोनाकाल में लाभ नहीं मिला पाया उसे हम जल्द से जल्द लाभ दिलाएंगे, बच्चों को चिह्नित कर जरूरी सर्जरी शुरू कर दी जाएगी।

डॉ राहुल जैन, अध्यक्ष जिला समन्वय समिति, आरबीएसके