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कोरोना ने सिखा दिया सफाई का महत्व

दिन में दस बार साबुन से धो रहे हाथ, सेनेटाइजर और मास्क के जरिये बचना चाहते हैं रोग से

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कोरोना ने सिखा दिया सफाई का महत्व

कोरोना ने सिखा दिया सफाई का महत्व

उदयपुर. कोरोना वायरस ही नहीं, कई ऐसी घातक बीमारियां हैं, जिनके रोगाणुओं का संक्रमण हमें मौत के मुंह तक ले जा सकता है, लेकिन स्वाइन फ्लू जैसे प्रकोप के दौरान भी लोगों में इतनी जागरूकता देखने को नहीं मिली, जो अब लोगों में देखी जा रही है।
शहर के बाजारों में बार-बार खत्म हो रहे सेनेटाइजर और मास्क और उनकी कम उपलब्धता की तुलना में बढ़ती मांग इसकी गवाह है कि लोग अब किसी भी तरह से बीमारी और वायरस से बचना चाहते हैं। यह चिंता इसलिए भी लोगों में ज्यादा है क्यों कि इस बीमारी का अभी तक कोई निश्चित इलाज या वैक्सीन नहीं आई है।
ेऐसे में लोग बचाव के लिए एहतियाती उपायों पर ही पूरी तरह जोर दे रहे हैं।
चूंकि परिवार का हर सदस्य अब घर में ही कैद है, लिहाजा एक-दूसरे को बार-बार साबुन से हाथ धोने और सेनेटाइजर का इस्तेमाल करने की हिदायत दे रहा है। बच्चों, युवाओं, महिलाओं और बड़े-बुजुर्गों तक में न केवल हाथों, बल्कि आंखों, कपड़ों और शरीर के हर अंग की साफ-सफाई के अलावा घर में टच प्वॉइंट्स की भी क्लिनिंग का ध्यान रखने की आदत बढऩे लगी है।
हर कोई कोशिश कर रहा है कि इन कोशिशों से वह वायरस के संक्रमण की चपेट में आने से बचा रहे। लोग बाहर की चीजें खाने को लेकर बच रहे हैं, वहीं घर में भी खाने-पीने की चीजों के हाइजिन होने को लेकर भी खास जागरूक हैं।
- स्वाइन फ्लू के वक्त थे लापरवाह
लोगों ने बताया कि स्वाइन फ्लू ने भी कई जानें लीं, लेकिन उस दौरान भी न तो घरों में, न दफ्तर या अस्पतालों में लोगों ने मास्क का इस्तेमाल किया, लेकिन कोविड-19 ने जिस तरह हमला बोला है, उसे देखते हुए हर कोई सतर्क है। जिनके पास मास्क उपलब्ध नहीं है, वे रुमाल या अन्य कोई कपड़ा बांधकर ही नाक, मुंह और आंखों के जरिये संक्रमण को रोकने का प्रयास कर रहा है।
- शहर में आई भारी कमी
उदयपुर शहर के मेडिकल स्टोर्स पर या तो मास्क खत्म हो गए हैं या मांग के मुकाबले उपलब्धता नहीं है। सेनेटाइजर भी महंगे हो गए हैं और बड़े पैक में मौजूद नहीं है। सरकार ने भले ही मास्क व सेनेटाइजर की कीमतें तय कर दी हों, लेकिन उपलब्धता ही घटने से कई मेडिकल स्टोर्स बंद होने लगे हैं।

संदेश और सबक भी
देश में स्वच्छता अभियान से एक तरह की शुरुआत हो चुकी थी। पहले जितनी गंदगी आज होती तो कोरोना के प्रकोप में तस्वीर और भयानक होती। जब हर इंसान को खुद के लिए गंदगी खतरनाक लगने लगी है, तब यह बदलाव आ रहा है। चिकित्सक और विशेषज्ञ भी लोगों को बता रहे हैं कि सफाई का क्या महत्व है। लोगों को अब पता चला है कि जब हाथ साफ रखने से जानलेवा बीमारी से इससे बचा जा सकता है, तो क्यों हाथ साफ रखें। यह एक संदेश भी है और सबक भी। प्रकृति के नियम तोडऩे पर आपको भुगतना ही पड़ेगा, प्रकृति ने यह सबक दिया है। हमें सबसे पहले अस्पतालों की जरूरत है, जिस पर अक्सर जिम्मेदारों ध्यान कम रहता है। कोरोना पूरे विश्व का ऐसा दुश्मन है, जिसे हम आंख से नहीं देख पाते हैं। उसके सामने बड़ी न्यूक्लियर पॉवर भी अब बौनी लगने लगी है। दुनिया घुटना टेककर खड़ी है।
डॉ. आरतीप्रसाद, प्रोफेसर, प्राणी शास्त्र विभाग, मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय