
आजमगढ़ क्राइम न्यूज
मो.इलियास/उदयपुर . उम्र महज 18 से 25 वर्ष, आंखों में महंगा चश्मा, दिखावे व स्टेट्स के लिए युवाओं के हाथों में डेढ़ से दो लाख रुपए कीमत की बाइक। बाइक को मॉडिफाइड करवाने का एेसा क्रेज कि शोरूम से बाहर आते ही गाड़ी घर से पहले मिस्त्री के पास पहुंचती है। हेड लाइट्स, सीट, ग्रिप कवर बदलाने के साथ ही इन्दौरी व पंजाबी साइलेंसर लगाकर उसे 'पटाखा' बाइक बनवाना पहली पसंद बनता जा है। इस बाइक को वे भीड़ के बीच पेट्रोल को बार-बार ऑन-ऑफ कर रहते हैं जिससे साइलेंसर से होने वाली पटाखे सी तेज आवाज लोगों को सहमा रही है। बाइकर्स के एेसे कृत्य की लगातार शिकायत पर यातायात पुलिस ने अभियान चलाकर एेसा पटाखा बजाया कि महज पांच दिन में सौ से ज्यादा मॉडिफाइड 'पटाखा' बाइक पकड़ में आ गई। पुलिस ने मोटर व्हीकल एक्ट में आरसी के उल्लंघन पर इन बाइक को जब्त किया। हाथोंहाथ कंपनी अधिकृत साइलेंसर लगाने वाले बाइकर्स को भारी भरकम चालान बनाकर छोड़ा तो कुछ बाइक्स के ज्यादा मॉडिफाइड होने पर उन्हें जब्त रखा, जिसे बाइकर्स ने कोर्ट में छुड़वाया। यातायात निरीक्षक नेत्रपाल सिंह ने बताया कि मॉडिफाइड बाइक के नम्बर नोट कर परिवहन कार्यालय को आरसी निलंबन के लिए लिखा गया है
पुलिस ने कंपनी के अधिकृत डीलर्स से जानकारी ली तो पता चला कि बाइक के साइलेंसर में जाली होती है, जो उसकी आवाज को कम करती है। इस जाली को निकालने पर फटी हुई तेज आवाज आती है। इस साइलेंसर की एवज में युवा बाजार में बिकने वाले इन्दौर व पंजाब के साइलेंसर खरीदकर लगवा लेते हैं जिससे आवाज में फर्क आने के साथ ही पेट्रोल का बंद करने पर पटाखे की आवाज आती है। साइलेंसर के इस बदलाव से बाइक का इंजन खराब होता है तथा एवरेज में भी गिरावट आती है। खरीदते समय युवाओं को समझाने के बावजूद वे पैसे से ज्यादा दिखावे पर ध्यान देते हैं। --
Published on:
30 Aug 2018 09:00 am
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