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पांच दशक का `दंगल’, पहलवान पसीने से सींचते रहे अखाडे़

- देश को नामी पहलवान दिए है मेवाड़ ने

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Famous wrestlers of the country tried their tricks in Dangal

Famous wrestlers of the country tried their tricks in Dangal

ये पांच दशक का दंगल है। इस मेवाड़ की माटी ने ऐसे- ऐसे मैदान के सूरमा दिए हैं, जिन्होंने सामने के दंगलवीर को पल भर में ही धूल चटा दी है। सन 1966 में उस्ताद लक्ष्मण सिंह ने स्वरूप सागर स्थित उस्ताद लक्ष्मण सिंह पहलवान व्यायामशाला की नींव रखी। उस्ताद तो अखाडे़ में उतरे ही लेकिन वह अकेले नहीं थे, अपने सातों भाईयों को भी सिर पर अखाडे की माटी मलकर लंगोट पहना दी। उन्होंने यहां से कई राष्ट्रीय व अन्तरराष्ट्रीय पहलवान तैयार किए.

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उस्ताद चले गए रह गई उनकी कलाबाजियां- उस्ताद लक्ष्मणसिंह के जाने के बाद अर्जुन राजौरा ने ये कार्य संभाला। उदयपुर में उन्होंने पहली बार मेवाड़ केसरी कुश्ती दंगल शुरू किया। यह दंगल उन्होंने अपने बड़े भाई उस्ताद लक्ष्मण सिंह की याद में शुरू किया। 1980 से लेकर 2018 तक लगातार महान राजस्थान मध्य प्रदेश केसरी कुश्ती दंगल का आयोजन करवाते रहे। यह कुश्ती दंगल वर्तमान समय में पूरे भारत में अपनी एक अलग पहचान रखता है, पूरे राजस्थान में कुश्ती जगत में जो किताब राजस्थान केसरी के नाम से विख्यात है, यह खिताब भी उन्हीं की देन है। वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय कुश्ती प्रशिक्षक डॉ हरीश राजौरा, अंतरराष्ट्रीय जूडो प्रशिक्षक डॉ हिमांशु राजौरा व कुश्ती प्रशिक्षक महेंद्र राजौरा इन तीनों भाइयों द्वारा कुश्ती का प्रशिक्षण दे रहे हैं।

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ये है हमारे बडे पहलवान

राकेश जैन, महेंद्र सिंह, डॉ.हिमांशु राजौरा, चाहत जैन, अंतरराष्ट्रीय कॉमनवेल्थ कुश्ती निर्णायक डॉ हरीश राजौरा, राष्ट्रीय स्तर के पदक विजेता पहलवान गणेश राजौरा, हरीश व्यास, मांगीलाल कटारिया, जसवंत वसीटा, प्रहलाद चौहान, मनोहर दया, सोनिया ओड़, चांदनी गौड, रेखा दीक्षित, सावित्री छीपा जैसी पहलवान शामिल हैं।-------

उदयपुर में ये है कुश्ती के अखाडेयहां करीब दस से 12 अखाडे हैं। उस्ताद लक्ष्मणसिंह व्यायामशाला, चतुर्भुज हुनमान व्यायामशाला, बजरंग व्यायामशाला आयड, लाल बहादूर शास्त्री व्यायामशाला दूध तलाई, पोंडल राष्ट्रीय व्यायामशाला इमली घाट, जवाहर राष्ट्रीय व्यायामशाला सिलावटवाड़ी, शिवदल राष्ट्रीय व्यायामशाला नाडाखाडा, भूपाल केसरी माणक व्यायामशाला सेक्टर पांच सहित करीब एक दर्जन अखाड़े चल रहे है। इसके अलावा करीब 10 से ज्यादा अखाडे समय के साथ बंद होते चले गए।

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ये है हमारी विरासत

- वर्तमान में 150 पहलवान हो रहे तैयार- वर्तमान में उदयपुर में करीब 150 अलग-अलग उम्र में महिला व पुरुष पहलवान तैयार हो रहे हैं।

- अन्तरराष्ट्रीय पहलवान व फिल्म अभिनेता 1985-86 में दारासिंह जब उदयपुर आए तो उन्होंने कहा कि नि:शुल्क कुश्ती जो करवाई जा रही है वह कुश्ती नहीं यज्ञ है। यहां फिल्म अभिनेता फिरोज खान, धर्मेन्द्र, डैनी डेन्जोंगपा, नरेन्द्रनाथ, डेविड, मोहन चोटी भी दंगल में आ चुके हैं।- अखाड़ों पर किसी जमाने में शस्त्र कला का पथालकड़ी का प्रदर्शन होता था, लेकिन अब धीरे-धीरे ये कला विलुप्त होती जा रही है।

- किसी जमाने में लेागों के घरों में मुगदर (लकडी से तैयार किया मोटा दंड) रखते थे। जिसे पहलवान एक्सरसाइज के लिए इस्तेमाल करते थे।

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ये है हमारी मांग- वर्तमान में हमारे पास केवल एक ही कुश्ती मेट उपलब्ध है, जबकि सभी बड़ी प्रतियोगिताएं मेट पर होती है। हमें ज्यादा मेट की जरूरत है।

- पहलवानों को आर्थिक प्राेत्साहन की जरूरत है, ताकि वह बेहतर डाइट के साथ आगे बढ सके।

- महिला पहलवान भी आगे आने लगी है, ऐसे में उन्हें भी प्रोत्साहन की जरूरत है।