
video : उदयपुर के इस दुर्गम गांव में मौत मचा रही ताण्डव, एक माह में 15 से ज्यादा बने काल के ग्रास..
सिकंदर पारीक/भुवनेश पण्ड्या/चंदनसिंह देवड़ा. उदयपुर. जिले के सायरा क्षेत्र के बोकाड़ा पंचायत के गरासिया बाहुल माजवड़ा गांव के घर-घर में मौत ताण्डव मचा रही है, हर घर में मातम पसरा है। मौत एक घर सेनिकल दूसरे घर में यूं पहुंच रही हो मानो सब कुछ तबाह कर ही लौटेगी। बीते एक माह में यहां एक के बाद एक सिलसिलेवार 15 से ज्यादा लोगों को मौत लील गई है, इसमें बच्चे से लेकर जवान, बूढ़े और गर्भवती महिलाएं तक शामिल हैं, लेकिन जिला प्रशासन से लेकर चिकित्सा महकमा बेखबर है, यहां तक कि किसी जनप्रतिनिधि को भी इतनी फुर्सत नहीं कि इनके हाल जान सके। हालात व्यवस्था की कलई खोलते हैं, ना अस्पताल, ना सडक़ , ना पीने को शुद्ध पानी। अज्ञात बीमारी का शिकार हुए इन लोगों को ना तो माकूल उपचार मिल रहा है, और ना ही यहां सरकार की नजर पहुंच रही है। हाल ये है कि गांव में दवा की गोली लोगों ने सालों से नहीं देखी। यहां जो भी मरता है, उसे वे मौत से पहले झाड़ फूंक से ठीक करने का प्रयास करते है, नहीं तो मौत के बाद ईश्वर की मर्जी कह किस्मत को कोसते हैं।
पत्थर-पहाड़-घने जंगल-तीन नदियों को पार कर पहुंचना होता है यहां
शहर से करीब 80 किलोमीटर दूर सायरा-रणकपुर मार्ग पर स्थित ये गांव मिठीबोर के समीप दुर्गम पहाड़ी वाले पथरीले मार्ग पर छह किलोमीटर अन्दर छितराया हुआ बसा है। यहां सरकार की किसी योजना की ‘रोशनी ’ नहीं पहुंची, बचपन धूल फांक रहा है, तो जवानी चूल्हे में दम फुला रही है। यहां कोई चोपहिया वाहन नहीं पहुंचता तो जान हथैल पर ले दुपहिया जरूर जा रहा है। हालांकि इस मार्ग पर ज्यादातर लोग पैदल ही नजर आएंगे। इस गांव में जाने के लिए घने जंगल, सुनसान राह, पहाड़ी टेड़े-मेड़े मार्ग और तीन नदियों को पार करना होता है। यहां जब भी कोई अजनबी पहुंचता है, तो लोग बड़ी हैरानी से देखते हैं, कारण ये है कि यहां तक पहुंचना किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं।
पहाड़ों के बीच गूंज रहा रूदन
पत्रिका टीम बुधवार दोपहर करीब छह किलोमीटर पैदल चल इस गांव तक पहुंची। जैसे-जैसे गांव समीप आता गया, पहाड़ों के बीच गूंजते मौत के क्रन्दन ने आभास करवा दिया कि यहां मौत ने ताण्डव मचा रखा है। अब भी लोगों का कहना है कि वे नहीं जानते कि मौते क्यों हो रही है, फूल से नन्हें बच्चों की मौत पर भी वे मौन हैं। दूर-दूर पहाडिय़ों पर बने टापरों और केलूपोश झोपड़ों में बीमार का बिस्तर बिछने के चंद दिनों में वह काल के गाल में समा रहा है, जिसे लेकर किसी अज्ञात बीमारी के फेलने से इंकार नहीं किया जा सकता है।
मरने वालों में बच्चे ज्यादा, बुखार...
बोकाड़ा पंचायत के माजवड़ा गांव में 15 से ज्यादा लोग मरे उसमें सबसे ज्यादा बच्चे है। इसमें माजवड़ा के सुरेश पिता विरमा उम्र 1 वर्ष,मुकेश पिता भोमाराम उम्र 7 माह,अनराम पिता राजाराम उम्र 3 वर्ष,लालाराम पिता लक्ष्मण उम्र 7 वर्ष,लक्ष्छी पिता घीसाराम उम्र 6 वर्ष,लालाराम पिता भेराराम उम्र 6 वर्ष,देवाराम पिता हंसाराम उम्र 50 वर्ष,मोहनी पति वक्ताराम उम्र 45 साल, गर्भवती गजरी बाई, केलाराम की पुत्री और एक प्रसूता व नवजात की मौत हो चुकी है। इसके अलावा इसी पंचायत के सीली, वंडा और कागा खादरा में भी मौतें हुई है।
ये सब बातें झूठी हैं, मेरी गृह पंचायत है, कहीं कोई ऐसी बात नहीं हैं। हमारा फील्ड है, हम अलर्ट हैं। सीएचसी चिकित्सकों को कहा था कि वहां कैंप लगाना।
मीराबाई, प्रधान सायरा
उपस्वास्थ्य केन्द्र बोकाड़ा पर दो माह से एएनएम का पद रिक्त है। मौतों की मुझे जानकारी नहीं है। मैं 20 दिन पहले गांव में गई थी।
संकु बाई, सरपंच बोकाड़ा पंचायत
Published on:
04 Oct 2018 05:36 pm
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