
मास्टर प्लान में पहाड़ों के संरक्षण की बड़ी-बड़ी बातें की गई हैं और उनको बचाने के लिए भी सरकारी एजेंसियों ने कई बैठकें कर ली लेकिन आज भी हमारे पहाड़ों को काटा जा रहा है। उदयपुर के मास्टर प्लान 2011-31 में पहाड़ों के संरक्षण की बात साफ तौर पर अंकित है लेकिन उस पर अमल उस सख्ती से नहीं हो रहा। उदयपुर शहर के आसपास और यूआईटी के पेराफेरी क्षेत्र में पहाड़ों को तेजी से काटा जा रहा है। पहाडिय़ों पर गैर वानिकी गतिविधियां बढ़ गई हैं। जिससे पहाड़ बर्बाद हो रहे हैं और उस क्षेत्र में रहने वाले वन्यजीव भी वहां से आबादी की तरफ बढ़ रहे हैं। हरियाली सिमटती जा रही है।
देबारी क्षेत्र की पहाडिय़ों और वन्यजीवों के बसेरे वाले घने जंगल के बीच बड़ी व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ गई है। चीरवा से उदयसागर तक वन्यजीवों के इस रास्ते में दखल बढ़ रहा है तो चीरवा से आगे देलवाड़ा तक दोनों तरफ पहाडिय़ों पर जेसीबी चल रही है, शिकायतें सामने आती है तो काम रुक जाता है और कुछ दिनों बाद पुन: पहले जैसी स्थिति हो जाती है। पहाड़ों पर होटल, रिसोर्ट सहित अन्य व्यावसायिक उपयोगों के लिए काम में ली जा रही है। यूआईटी ने इन पहाडिय़ों के संरक्षण के लिए नीति के लिए मसौदा बनाने की शुरुआत की लेकिन अभी तक जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हुआ है।
बहुत विनाश हुआ है, वनस्पति घटी
पिछले 15 से 20 वर्षों में हमारे क्षेत्र में पहाडिय़ों का काफी विनाश हुआ है, वनस्पति घटी है। आज तापमान से जिस तरह हम परेशान हो रहे हैं, उसका सबसे बड़ा कारण पहाडिय़ों का विनाश व वनस्पति का घटना है। पहाडिय़ों के संरक्षण के लिए अलग ही मास्टर प्लान बनना चाहिए और इसके लिए सख्त कानून की जरूरत है। पहाड़ी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां रोकनी होगी। पहाड़ी क्षेत्रों में देववन विकसित किए जाए। यानी ऐसे पौधे लगाए जाए जिनको पूजा जाता है और काटा नहीं जाता है ताकि पहाडिय़ों पर हरियाली भी रहेगी। वहां पर झरने विकसित किए जाए और नीचे कुंड बनाए जाए ताकि आसपास पेड़-पौधे लगाए जाएंगे तो वे सूखेंगे नहीं।
आर. एल. लोढ़ा, पर्यावरणविद्
पहाडिय़ों को लेकर हम चिंतित व सख्त
निजी स्वार्थ के लिए पहाडिय़ों को काटने वालों पर हमने पूरी सख्ती की है। मैंने जब कार्यभार संभाला तब भी पहली बात पहाडिय़ों के संरक्षण को लेकर ही कही थी। पहाडिय़ों के अस्तित्व को बचाने के लिए हम कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। हम पहाडिय़ों के संरक्षण के लिए कानून बना रहे हैं, हमारे दल को पूणे भी भेजा। बाद में हमने विशेषज्ञों से राय भी ली और अब जनप्रतिनिधियों से राय लेंगे। कानून बनाने को लेकर अभी प्रक्रिया चल रही है लेकिन यह साफ है कि पहाडिय़ों को लेकर हम चिंतित और सख्त है।
रवीन्द्र श्रीमाली, चेयरमैन यूआईटी
Published on:
26 May 2017 02:33 pm
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