
जावर माता की श्रृंगारित प्रतिमा।
उदयपुर. जनजाति अंचल में स्थित प्राचीन जावर माता मंदिर के जीर्णोद्धार और विकास कार्य शुरू हो गए हैं। श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए 5.24 करोड़ रुपए की लागत से यह परियोजना तैयार की गई है, इसकी बजट घोषणा वर्ष 2024-25 में की गई थी। जनजाति विकास विभाग के माध्यम से इन कार्यों के लिए राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड (आरएसएएमबी), उदयपुर को कार्यकारी एजेंसी बनाया गया है। इसके तहत 6 मार्च को कार्यादेश जारी किए गए। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार निर्माण कार्य 17 मार्च 2026 से शुरू होकर 16 मार्च 2027 तक पूर्ण किया जाना है। 12 माह में यह पूरा प्रोजेक्ट तैयार होगा।परियोजना के तहत मंदिर परिसर का संपूर्ण जीर्णोद्धार किया जाएगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रसोई घर, भोजनशाला, लॉकर व क्लॉक रूम का निर्माण होगा। साथ ही टीडी से जावर मार्ग और मंदिर परिसर के पास दो भव्य प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे तथा पार्किंग क्षेत्र विकसित किया जाएगा। इसके अलावा प्रसाद काउंटर, नदी के ब्रिज पर रिटर्निंग वॉल, सोलर लाइटिंग और वॉक-वे पर बैठने के लिए सीटें भी लगाई जाएंगी।
--------मंदिर की विशेषताएं
जावर माता को महिषमर्दिनी रूप में पूजा जाता है, जिन्हें स्थानीय रूप से धातु (खनिज) की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। मंदिर का निर्माण लगभग 10वीं सदी का माना जाता है, इसमें वैष्णव स्थापत्य शैली की झलक मिलती है। मान्यता है कि जावर की खानों से निकली धातु ने मेवाड़ की आर्थिक समृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लोककथाओं के अनुसार देवी ने भक्त को धातु प्राप्ति का रहस्य बताया, जिससे क्षेत्र में संपन्नता आई। जावर की धातु और सिक्कों की ख्याति देश-विदेश (टक्क, लाट, कर्नाटक, बसरा, चीन) तक रही।-------
वर्जन:जावर माता मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विस्तृत योजना बनाई गई है। मंदिर का संचालन देवस्थान विभाग के अधीन है और सभी कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी, ताकि यात्रियों को अधिकतम सुविधाएं मिल सकें।
- जतिन गांधी, सहायक आयुक्त, देवस्थान विभाग
Updated on:
30 Mar 2026 01:58 am
Published on:
30 Mar 2026 01:58 am
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