
Diwali 2022 पंच दिवसीय पर्व इस बार सूर्य ग्रहण के कारण 6 दिन का हो गया है। 24 अक्टूबर को कुछ ऐसा संयोग बना है कि रूप चौदस (नरक चतुर्दशी) व दीपावली पर्व एक ही दिन मनाया जाएगा। पर्व के तहत हर घर, हर देहरी दीपों से रोशन हो गई है तो वहीं, बाजारों में भी चकाचौंध है। पूरी लेकसिटी जगमगा गई है और सोमवार को रूप चतुर्दशी के साथ दीपावली का पर्व मनाएगी। वहीं, 25 को सूर्य ग्रहण के कारण खेंखरा नहीं मनाया जाएगा। अगले दिन यानी 26 को गोवर्धन पूजा और भाई दूज का पर्व मनाया जाएगा।पं. जगदीश दिवाकर ने बताया कि कार्तिक मास में अमावस्या के दिन प्रदोष काल में दीपावली (महालक्ष्मी पूजन) करने का विधान है। धार्मिक मतों के अनुसार यदि दो दिन तक अमावस्या तिथि प्रदोष काल का स्पर्श न करे तो दूसरे दिन दिवाली मनाने का विधान है। यह मत सबसे ज्यादा प्रचलित और मान्य है। वहीं, एक अन्य मत के अनुसार, अगर दो दिन तक अमावस्या तिथि, प्रदोष काल में नहीं आती है, तो ऐसी स्थिति में पहले दिन दिवाली मनाई जानी चाहिए। इसके अलावा यदि अमावस्या तिथि का विलोपन हो जाए, यानी कि अगर अमावस्या तिथि ही न पड़े और चतुर्दशी के बाद सीधे प्रतिपदा आरम्भ हो जाए, तो ऐसे में पहले दिन चतुर्दशी तिथि को ही दिवाली मनाने का विधान है। इस बार 25 अक्टूबर को शाम में प्रदोष काल लगने से पहले ही अमावस्या समाप्त हो रही है। ऐसे में दिवाली का पर्व 24 अक्टूबर को ही मनाया जाएगा।
24 अक्टूबर दीपावली पर्व : लक्ष्मी पूजन प्रदोष युक्त अमावस्या में लक्ष्मी पूजन श्रेष्ठ
कार्तिक मास कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि सोमवार को मनाया जाएगा। 24 अक्टूबर प्रदोष काल में अमावस्या होने से दीपावली इसी दिन मनाई जाएगी क्योंकि लक्ष्मी पूजन प्रदोष युक्त अमावस्या में स्थिर लग्न में किया जाना श्रेष्ठ होता है।
आज इस शुभ मुहूर्त में करें लक्ष्मी पूजन :
अमृत का चौघड़िया - प्रातः 6:41 से 8:05 तक
शुभ का चौघड़िया - प्रातः 9:30 से प्रातः 10:54 तक
चर, लाभ, अमृत का चौघड़िया- दोपहर 1:43 से शाम को 5:57 तक
इस दिन सर्वश्रेष्ठ अभिजीत मुहूर्त - प्रातः 11:57 से दोपहर 12:42 तकप्रदोष काल में पूजन - शाम 5:57 से रात्रि 8:13 तक
चर का चौघड़िया - शाम को 5:57 से 7:36 तक
लाभ का चौघड़िया- रात्रि 10:45 से मध्य रात्रि 12:20 तक
शुभ अमृत का चौघड़िया - मध्य रात्रि 1:54 से अगली प्रातः 6:41 तक रहेगा
इस दिन वृषभ लग्न - शाम को 7:13 से रात्रि 9:10 तक
सिंह लग्न मध्य रात्रि 1:54 से अन्तरात्रि रात्रि 3:57 तक
अमावस्या तिथि 24 अक्टूबर को शाम 05:27 से 25 अक्टूबर को शाम 04:18 तक
- पूजन के लिए श्रेष्ठ समय मध्य रात्रि 2:29 से पहले पहले रहेग। क्योंकि इसके बाद खंडग्रास सूर्य ग्रहण का सूतक प्रारंभ हो जाएगा।
गोवर्धन पूजा व भाई दूज -
26 अक्टूबर को दोपहर 3:35 के बाद द्वितीया तिथि लगेगी। इस त्योहार में भगवान कृष्ण के साथ गोवर्धन पर्वत और गायों की पूजा का विधान है। इसी दिन भगवान कृष्ण को 56 भोग बनाकर लगाया जाता है।
गोवर्धन पूजा अन्नकूट भाई दूज मुहूर्त -
लाभ अमृत : 6:42 से 9:30 तक
शुभ वेला : 10:54 से 12:18 तक लाभ वेला 4:29 से 5:53 तक
रोकड़ मिलान लेखन :
श्री नव कार्य शुभारम्भ हेतु कार्तिक कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा बुधवार तारीख 26-10-2022 को प्रातः 6ः46. से 9ः34 तक लाभ-अमृतवेला दिवा 10ः58 से 12ः00 तक शुभ वेला सोकार रहेगी।
Updated on:
24 Oct 2022 03:07 pm
Published on:
24 Oct 2022 03:06 pm
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