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चकमा दे रहा है पैंथर

लगातार 8वें दिन पैंथर पकडऩे में नाकाम रहा वन विभाग
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उदयपुर

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Surendra Singh Rao

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Updated: 19 Oct 2018, 2:26 AM IST

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चकमा दे रहा है पैंथर

धरियावद. तहसील के करमेलिया वन खण्ड सहित सात गांवों में पैंथर का खौफ वन विभाग एवं स्थानीय लोगों के लिए चुनौती बना हुआ है। पिंजरे के बिछाए गए जाल और ड्रेप कैमरों को चकमा देकर पैंथर लगातार आठवें दिन विभाग की पकड़ से बाहर रहा। इधर, स्थानीय लोगों का जंगल में मवेशी चराना बिल्कुल बंद हो गया है। खेतों और घरों के बाहर भी लोग डरे-सहमे हुए एहतियात बरत रहे हैं। सूर्यास्त के बाद लोगों को घरों से बाहर निकलना लगभग बंद है। रात के समय लोग आग जलाकर थालियों एवं चम्मच की आवाज के साथ समूह में मवेशियों की सुरक्षा कर रहे हैं। विभागीय असफलता के बीच लोगों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इधर, बढ़ती समस्या के बीच वनविभाग ने ड्रेप कैमरों की संख्या ५ से बढ़ाकर १० कर दी है। गुरुवार को उपवनसरक्षंक अमरसिंह गोठवाल, सहायक वन सरक्षंक सुबोध कुमार सिंह ने भी सर्च ऑपरेशन में हिस्सा लिया। क्षेत्रीय वन अधिकारी दारासिंह राणावत के अनुसार भूत बावजी, हांडाखेडा लिफटकैनाल रास्ता, मातामंगरी, मंगरीफला, मायाखेडी देवला में अलग से ड्रेप कैमरे लगाए गए हैं।
जंगल का खौफ
लगातार सर्च ऑपरेशन के बावजूद पैंथर हाथ नहीं आने से ३ ग्राम पंचायतों झड़ौली, देवला एवं लोहागढ़ के ७ ग्रामों के ग्रामीण खौफजदा हैं। आलम यह है कि अधिकांश ग्रामीणों ने मवेशियों को जंगल में चराना छोड़ रखा है। वह मवेशियों के साथ अधिकांश समय खेत में निकाल रहे हैं।
समूह में रात्रि जागरण
पैंथर का खौफ इस कदर है कि ग्रामीणों में प्रशासनिक अमले एवं विभागीय तैयारियों को लेकर भरोसा नहीं बचा है। लोग खुद रात के समय समूह में जागरण कर रहे हैं। घरों के बाहर आग लगाकर ग्रामीण डंडों की मदद से सुरक्षा के जतन कर रहे हैं। महिलाएं हाथ में थाली व चम्मच लेकर उनका सहयोग कर रही हैं। बारी-बारी से समूह में बदलाव का दौर पूरी रात चलता है।