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Rajasthan Roadways: ऑनलाइन टिकट बुकिंग में फेल राजस्थान रोडवेज? यात्रियों को हर दिन उठानी पड़ रही परेशानी

Rajasthan Roadways Online Ticket: डिजिटल युग में भी राजस्थान रोडवेज की टिकट व्यवस्था कई दशक पीछे नजर आती है, जबकि निजी बस संचालक आधुनिकता की ओर बढ़ रहे हैं।
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राजस्थान रोडवेज की बस। पत्रिका फाइल फोटो

Rajasthan Roadways Online Ticket Booking: राजस्थान रोडवेज बस का टिकट लेना आम आदमी के लिए मुश्किलों भरा होता जा रहा है। कर्मचारियों की कमी के कारण विंडो पर भी आसानी से टिकट नहीं मिल रहा है। ऐसे में यात्री सीधे बसों में सवार हो रहे हैं और कई बार सीटों को लेकर विवाद की स्थिति भी बन जाती है। वर्तमान डिजिटल युग में भी रोडवेज की टिकट व्यवस्था कई दशक पीछे नजर आती है, जबकि निजी बस संचालक आधुनिकता की ओर बढ़ रहे हैं।

डेढ़ साल पहले उदियापोल स्थित बस स्टैंड पर छह टिकट विंडो और एक आरक्षण विंडो संचालित होती थीं। धीरे-धीरे इन्हें बंद कर दिया गया। वर्तमान में बस स्टैंड पर केवल एक नंबर की टिकट विंडो ही संचालित हो रही है, वह भी सुबह 6 से दोपहर 12 बजे तक एक ही शिफ्ट में। इसके बाद आने वाले यात्रियों को सीधे बस में चढ़ना पड़ता है, जिससे उन्हें आरक्षित सीट नहीं मिल पाती।

ऐप से नहीं हो रही बुकिंग

रोडवेज की ओर से मोबाइल के जरिये टिकट बुक करने के लिए ऐप उपलब्ध कराया गया है, लेकिन यह ऐप अक्सर काम नहीं करता। इससे टिकट बुक करना यात्रियों के लिए कठिन हो गया है। बताया जाता है कि यह ऐप केवल तेज इंटरनेट स्पीड पर ही सही तरीके से संचालित होता है। उदयपुर से संचालित लंबी दूरी की बसों में यात्रा करने वाले लोग ऐप और अन्य माध्यमों से टिकट बुक कराने का प्रयास करते हैं, लेकिन सफलता नहीं मिलने पर उन्हें बार-बार बस स्टैंड के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

रोजाना 300 बसों का संचालन

उदियापोल बस स्टैंड से उदयपुर डिपो की करीब 80 बसों सहित विभिन्न डिपो की लगभग 300 बसों का प्रतिदिन संचालन होता है। यहां से रोजाना करीब 14 हजार यात्रियों का आवागमन होता है। बसों का संचालन मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और गुजरात सहित कई राज्यों के विभिन्न जिलों के लिए किया जाता है। पर्यटन नगरी होने के कारण बड़ी संख्या में पर्यटक भी बसों से आवागमन करते हैं।

कर्मचारियों की कमी बनी वजह

पहले टिकट विंडो पर चालक और परिचालकों की ड्यूटी लगाई जाती थी, लेकिन कर्मचारियों की कमी के कारण बस संचालन प्रभावित होने लगा। इसके बाद विंडो पर कार्यरत कर्मचारियों को उनके मूल कार्यस्थल और रूट पर भेज दिया गया। इसी कारण अधिकांश टिकट विंडो बंद करनी पड़ीं।