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‘समुद्री पानी’ से मुरझा गई जिंदगी, मिटती नहीं है मीठे पानी की तलाश, जानें पूरी कहानी

कोल्यारी में कुदरती खारे पानी की समस्या से प्रभावित 3156 जिंदगियां

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water crisis in rajasthan

A village alive with the water of the forest

फलासिया. पंचायत समिति के कोल्यारी गांव में जमींदोज ‘समुद्री पानी’ से यहां रहने वाले लोगों के लिए मीठे पानी की व्यवस्था करना हर पल चुनौती बन रहा है। जन स्वास्थ्य एवं अभियंात्रिकी विभाग की डगमगाई जलापूर्ति व्यवस्था ने भीषण गर्मी के बीच यहां रहने वाली जिंदगी के इस संकट को और भी गहरा दिया है।

भीषण गर्मी के इस दौर में ग्रामीण अंचल के इलाकों में जहां चहुंओर पानी को लेकर त्राही-त्राही मची हुई है। वहीं इस गांव के लोगों को दूसरे गांव में जाकर पानी उससे भी बड़ा दु:ख का कारण बना हुआ है। वर्तमान में इस गांव में 3156 लोग रह रहे हैं, जो मीठे पानी की तलाश में भीषण गर्मी के बीच प्रतिदिन एक किलोमीटर का सफर तय कर रहे हैं। बावजूद इसके प्रशासनिक स्तर पर कुदरती कहर के स्थायी समाधान को नहीं तलाशा जा रहा है। यहां तक की गर्मी में इस गांव में जलापूर्ति के लिए पानी के टैंकर की भी सुविधा नहीं की गई है।


नहीं खुदवाते ट्यूबवेल
पंचायत समिति क्षेत्र की कोल्यारी ग्राम पंचायत की मुख्य आबादी वाली बस्ती के ठीक नीचे जमीन कई पीढिय़ों से कुदरती खारा पानी उगल रही है। इन्ही कारणों के चलते इस क्षेत्र में कोई भी व्यक्ति ट्यूबवेल नहीं खुदवाता। जमीन और सीमाओं का ही फर्क है कि गांव के बाहर दो बने हुए दो कुओं के भरोसे इस गांव के 3156 लोगों का वर्ष के 8 महीने गुजारा होता है। गर्मी के 4 महीने इस गांव पर हरदम भारी पड़ते हैं। मुस्लिम बस्ती के समीप एक हैंडपंप है, जो मूल आबादी से करीब एक किलोमीटर पड़ता है। लोग यहीं से पीने का पानी लाते हैं। गर्मी में हैण्डपंप व कुएं से निकलने वाले गंदले पानी की गंदगी को फिटकरी से नीचे बिठाकर लोग दिनचर्या में पीने के पानी की जरूरतों को पूरा कर रहे हैं।


कुओं ने भी दिया जवाब
कोल्यारी के बाहर जलदाय विभाग के स्तर पर क्षेत्रवासियों के लिए 80 हजार लीटर भराव क्षमता वाली टंकी बनवाई हुई है। इसमें संबंधित दो कुओं से पानी भरा जाता है। वर्तमान में एक कुआं पूरी तरह सूख चुका है, जबकि दूसरे कुएं से 3 घंटे मोटर चलाने पर पानी खत्म हो जाता है। इस अवधि में 80 की बजाय 50 हजार लीटर पानी ही टंकी में चढ़ पाता है। इस संकट में विभाग स्तर पर गांव के 6 अलग-अलग हिस्सों में जलापूर्ति की व्यवस्था के तहत 10 से 12 दिन में एक बार जलापूर्ति होती है। यह सुविधा भी विद्युत आपूर्ति पर निर्भर होती है।


गर्मी और बारिश दु:खदायी
गांव में जमींदोज पानी वर्षों से खारा है। इस वजह से गर्मी व बारिश में पेयजल किल्लत गहरा जाती है। कई बार इस दिक्कत को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों से उम्मीदें जताई, पर नतीजा जस का तस है।
नारायण नंगाची, ग्रामीण कोल्यारी

450 नल कनेक्शन
कोल्यारी कस्बे में 450 के लगभग नल कनेक्शन हैं। 6 फलों में बांटकर जलापूर्ति होती है। कुएं में पानी की कमी से जलापूर्ति व्यवस्था गड़बड़ाई हुई है।
बाबूलाल वडेरा, सचिव, ग्राम पंचायत कोल्यारी