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उदयपुर : तीन साल में 19 फीसदी बढ़े मादक पदार्थ तस्करी के केस

प्रदेश में पिछले तीन वर्षों में मादक पदार्थ तस्करी के मामलों में करीब 19 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जबकि शराब तस्करी के मामले लगभग स्थिर रहे हैं।
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उदयपुर

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Mukesh Gaur

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Updated: 26 Jun 2026, 6:05 PM IST

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AI photo

उदयपुर. प्रदेश में शराब और मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ पुलिस की ओर से अभियान चलाए जा रहे हैं। धरपकड़ की जा रही है, लेकिन तस्करों की करतूतें कम नहीं हो रही हैं। नित नए हथकंडे अपनाते तस्कर नशे के सौदागर बने हुए हैं। प्रदेश में पिछले तीन साल की स्थिति देखें तो शराब तस्करी के मामलों में समानता बनी हुई है, जबकि मादक पदार्थ के मामलों में करीब 20 फीसदी का उछाल है। प्रदेश में उदयपुर जैसे पर्यटन वाले शहरों में मादक पदार्थों की तस्करी का जाल ज्यादा फैला हुआ है। होटलों में पर्यटकों को नशे का सामान उपलब्ध कराने के साथ ही स्थानीय युवाओं को नशे की गिरफ्त में लेने का खेल भी जारी है।


तीन साल में दर्ज मामलों का लेखा-जोखा

शराब तस्करी के केसवर्ष 2023 : 26568वर्ष 2024 : 24161वर्ष 2025 : 24217मादक पदार्थ तस्करीवर्ष 2023 : 4872वर्ष 2024 : 5246वर्ष 2025 : 6256

मानस पोर्टल और टोल फ्री नंबर 1933 को लेकर जानकारी ही नहीं

नशे के खिलाफ आमजन को जागरूक करने और अवैध गतिविधियों की रोकथाम के लिए केंद्रीय नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने दो साल पहले मानस पोर्टल और टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1933 जारी की थी। लेकिन प्रचार के अभाव में लोगों को अपेक्षाकृत कम ही जानकारी है। ऐसे में जिला प्रशासन और जिला पुलिस अधीक्षक ने जिले के सभी थानाधिकारियों को पोर्टल व हेल्पलाइन के प्रचार के निर्देश दिए हैं।


मानस पोर्टल पर आमजन नशे की तस्करी, मादक पदार्थों की बिक्री तथा नशे से संबंधित अन्य गतिविधियों की शिकायत दर्ज करा सकते हैं। पोर्टल पर नशामुक्ति सेवाओं, जागरूकता संसाधनों, सरकारी पहल व उपचार केंद्रों से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध है। शिकायतकर्ता सहायक विवरण अपलोड कर सकते हैं तथा अपनी शिकायत की स्थिति भी ट्रैक कर सकते हैं।


हेल्पलाइन से मादक पदार्थों के उपयोग व मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जुड़ी शिकायतों पर सहायता प्राप्त की जा सकती है। नशे से ग्रसित व्यक्ति या उनके परिजन प्रशिक्षित काउंसलर व सहायताकर्मियों से सीधे संपर्क कर सहायता ले सकते हैं। परामर्श, नजदीकी उपचार व पुनर्वास केंद्रों के लिए रैफरल तथा आवश्यकतानुसार फॉलोअप सहायता भी प्रदान की जाती है।

'काकू, तुम शराब क्यों पीते हो?...' एक सवाल ने बदली नशे में डूबी जिंदगी

सरकार के 'नशा मुक्त भारत अभियान' के बीच शहर के युवा नरपतसिंह चौहान बड़ा मिशन लेकर चल रहे हैं। खुद नशे की काली दुनिया से बाहर निकले नरपतसिंह अब युवा पीढ़ी को नशे के दलदल से बचाने में जुटे हैं। उनकी ओर से संचालित 'आरोग्य सेवा संस्थान' आज न केवल नशा पीड़ितों के उपचार का केंद्र है, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाने का माध्यम बन चुका है।नरपत के अनुसार शुरुआत में उन्हें लगता था कि वे कभी-कभार शराब पीते हैं, लेकिन यह आदत कब लाइलाज बीमारी में बदल गई, उन्हें पता ही नहीं चला। तीन माह की उम्र में पिता का साया खो चुके नरपत को मां ने बड़ी मुश्किल से पाला था। लेकिन उनकी लत ने सब तबाह कर दिया। सामाजिक तिरस्कार और शारीरिक रूप से टूट चुके नरपत के लिए वह दौर मौत के समान था।


नशा मुक्ति केंद्र में इलाज के दौरान जब उनका शरीर जॉइंटिस और लिवर फेलियर के कारण कांप रहा था, तभी उनकी छोटी भतीजी ने सवाल पूछा- 'काकू, तुम शराब क्यों पीते हो?' इस एक सवाल ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया और उन्होंने फिर से वही इंसान बनने का संकल्प लिया, जो परिवार का लाडला था।


आज नरपत 'आरोग्य सेवा संस्थान' के जरिये दो मोर्चों पर काम कर रहे हैं- इलाज व काउंसलिंग के माध्यम से 1500 से अधिक लोगों को नशे से आजाद कराना, तथा उदयपुर व आसपास के जिलों के विद्यालयों, कोचिंग संस्थानों और गली-मोहल्लों में युवाओं को नशे के घातक परिणामों के प्रति जागरूक करना। उनका यह अभियान भारत सरकार के 'नशा मुक्त भारत अभियान' को भी मजबूती दे रहा है।


उनका मानना है कि युवाओं को नशे के झूठे 'हाई' के पीछे भागने के बजाय मेहनत और संघर्ष से सफलता हासिल करनी चाहिए। समाज के नाम संदेश में वे कहते हैं कि नशा एक बीमारी है और नशे का आदी व्यक्ति अपराधी नहीं बल्कि रोगी है, जिसे समाज से नफरत नहीं बल्कि मदद की जरूरत है।