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Earthday: पृथ्वी और पर्यावरण को बचाने में करना होगा परंपरागत संस्कृति का पालन

Earthday: 'सस्टेन मदर अर्थ' विषयक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी, पृथ्वी दिवस के मौके पर संगोष्ठी, समापन आज

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Earthday: पृथ्वी और पर्यावरण को बचाने में करना होगा परंपरागत संस्कृति का पालन

Earthday: पृथ्वी और पर्यावरण को बचाने में करना होगा परंपरागत संस्कृति का पालन

Earthday: डॉ. दौलत सिंह कोठारी शोध एवं शिक्षा संस्थान की ओर से विज्ञान समिति में आयोजित संगोष्ठी में दूसरे दिन भी विद्वानों के व्याख्यान हुए। मुख्य वक्ता वैदिक एवं आधुनिक भौतिक विज्ञान शोध संस्थान भीनमाल के अध्यक्ष आचार्य अग्निव्रत नैष्ठिक ने कहा कि पृथ्वी और पर्यावरण को बचाने में हमें हमारी परंपरागत संस्कृति का पालन करना होगा। संस्कृत में सभी तरह के सिद्धांत की व्याख्या अच्छी तरह से करी गई है।

कार्यक्रम निदेशक डॉ. सुरेन्द्र सिंह पोखरना ने बताया कि दूसरे दिन के सत्र में अमरीकी वैज्ञानिक वेरान नेप्पे और एडवर्ड क्लोज वर्चुअल माध्यम से जुड़े। उन्होंने 'अंतरिक्ष समय और चेतना' विषय पर बात रखी। गणितीय पद्धति और अध्यात्म के मेल के बारे में विचार रखे। शोधार्थी छात्रों के लिए अलग से समानांतर सत्र का आयोजन किया गया। जिसमें पृथ्वी, प्रकृति और पर्यावरण बचाने के बारे में लेख प्रस्तुत किए गए।

आज पत्रिका के प्रधान संपादक का वक्तव्य

संगोष्ठी के अंतिम दिन सोमवार को राजस्थान पत्रिका के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी का वर्चुअल माध्यम से वक्तव्य होगा। वे पृथ्वी का भविष्य, स्वामी दयानंद, दक्षिण से गोरक्षा संस्थापक का शांति अभियान, अहिंसा और शाकाहार विषय पर मार्गदर्शन करेंगे। इसके अलावा डाॅ. धर्मेन्द्र बलहारा विचार रखेंगे। समापन समारोह के मुख्य अतिथि सांसद अर्जुनलाल मीणा होंगे।

आयोजन में इनका भी योगदान

आयोजन में शंखेश्वरपुरम में निर्माणाधीन विज्ञान तीर्थ पालिताना (गुजरात), मोहनलाल सुखाडिय़ा विवि, विज्ञान और अध्यात्म अनुसंधान संस्थान अहमदाबाद, जैन एकेडमी ऑफ स्कॉलर्स अहमदाबाद, ग्लोबल शांति संगठन दुबई, जैना इंडिया फाउंडेशन मुंबई, श्रुत रत्नकर अहमदाबाद, राजस्थानी भाषा और संस्कृति प्रचार मंडल अहमदाबाद का सहयोग रहा।

इन्होंने भी रखे विचार

- इसरो के वैज्ञानिक डॉ. हरिश सेठ ने जलवायु परिवर्तन के पृथ्वी और मनुष्यों पर होने वाले प्रभावों के विषय पर विचार रखे।

- शकुन्तला पगारिया ने ज्ञान पंचमी के महत्व और उसके बाद पंचमी के उपवास से शिक्षा के क्षेत्र में परिवर्तन पर अनुभव बताए।

- साध्वी प्रांशुश्री और डॉ. वंदना मेहता का व्याख्यान हुआ। उन्होंने भारतीय दर्शन के परिप्रेक्ष्य में महात्मा गांधी के चिंतन के बारे बात की।

- सुधीर सेट्टी ने कहा कि समाज को आगे आना होगा और आम आदमी को जिम्मेदारी लेनी होगी और खपत को सीमित करना होगा।

- संदीप शर्मा ने कहा कि हमें अपने संसाधनों का उपयोग सीमित करना होगा और धरती के रहस्य को जानना होगा। संसाधनों का उपयोग संतुलन तरीके से करना होगा। हमें प्रकृति के साथ सह अस्तित्व रखना होगा।

- चैतन्य संघाणी ने कहा कि प्रकृति परंपरा जीवन शैली को अपनाकर ही हम प्रकृति और पृथ्वी को सुरक्षित कर सकते हैं।

- न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुधीर शाह ने कहा कि हम चाहेंगे तो खुश रह पाएंगे। हमें देने का सुख अपनाना होगा। सुख-दुख का भाव हमारे अंदर ही छिपा है।

- सुषमा सिंघवी ने कहा कि पृथ्वी ही जीवन है और जीवन ही पृथ्वी है। सहयोग और देने की भावना से ही हम सह अस्तित्व में रह सकते हैं।

- डॉ. आरएम पांड्या ने कहा कि प्रकृति से सहयोग करके ही और संसाधनों का सही उपयोग करके ही हम प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा कर सकते हैं।

- कनक मादरेचा ने दुबई से विश्व शांति संघ की गतिविधियों के बारे में बताया, जो पचास देशों में चल रहा है और 200 से ज्यादा सदस्य हैं।

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