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अगर उदयपुर के मशहूर मावा, कलाकंद का स्वाद लेेना है तो हरि ऊं की दुकान पर जरूर जाइएगा। यहां जाकर बस आपको हरि ऊं बोलना है और आपको मावा मिल जाएगा। यह चलन आज या कल का नहीं, बल्कि पिछले 50 सालों से है। जगदीश चौक स्थित हरि ऊं की दुकान के सत्यनारायण अरोड़ा ने बताया कि उनके दादा गोवर्धनलाल ने ये दुकान शुरू की थी। हरि ऊं बोलने का उनका ही नियम था और जो उस दुकान पर आकर हरि ऊं बोलता था, वो उसे मावा देते थे। यही चलन उनके पिता प्रभुदयाल और फिर उन्होंने भी बनाए रखा। अब उनका बेटा रविप्रकाश भी यह पुश्तैनी काम कर रहा है। यानी चार पीढि़यों से वे शहरवासियों को लाजवाब मावे, कलाकंद खिलाते आ रहे हैं।
विदेशों में भी हैं मावे के कई मुरीद
सत्यनारायण अरोड़ा ने बताया कि वे 4 बजे उठकर मावा बनाते हैं। हर दिन लगभग 30 किलो मावा बनाते हैं। मावा बनाकर पहले वे जगदीश मंदिर जाते हैं फिर दुकान पर जाते हैं। मावे का भोग भगवान जगदीश को भी चढ़ाया जाता है। कई भक्त यही से मावा ले जाते हैं। उन्होंने बताया कि वे जब 10 साल के थे तब पिता से मावा बनाना सीखा था। उनके हाथ का हुनर विरासत में मिला है। अब वे 76 साल के हो गए हैं, लेकिन अब भी वे उतने ही सधे हाथों से बिना थके मावा बनाते हैं। सुबह 10.30 से रात 9 बजे तक दुकान पर बैठते हैं। इसके उनका बेटा भी पूरी मदद करता है। उनके मावे का स्वाद लोगों को उनकी दुकान तक खींच लता है और मुंबई से लेकर अमरीका व अन्य देशों तक भी जा रहा है।
Updated on:
10 Feb 2023 11:16 pm
Published on:
10 Feb 2023 11:15 pm
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