
उदयपुर . बिना स्वीकृति किसान के खेत में डाली गई विद्युत लाइन के बाद पोल टूटने से टकराए तारों की चिंगारी से फसल में आग लगने पर न्यायालय ने अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड की सेवा में दोष माना। स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष के.बी.कट्टा, सदस्य सुशील कोठारी व ब्रजेन्द्र सेठ ने सुनवाई के बाद विपक्षी निगम को आदेश दिया कि वह दो माह में परिवादी किसान को नुकसान के ५० हजार रुपए व शारीरिक, मानसिक, आर्थिक व वाद व्यय के पांच हजार रुपए अलग से अदा करे।
न्यायालय ने यह निर्णय नवानिया वल्लभनगर निवासी किशनलाल पुत्र सवराम व्यास बनाम अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड जरिये अधीक्षण अभियंता पटेल सर्कल व सहायक अभियंता वल्लभनगर के मामले में दिया। न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट लिखा कि एक कृषक के जीवन का आधार एवं बदलती मौसमी परिस्थितियों के उपरांत आशा की किरण मात्र फसल पैदावार ही होती है जो कि संबंधित फसल के लिए स्वयं एवं परिवारजन द्वारा लगातार कई माह तक की गई कड़ी मेहनत, बहाए गए पसीना, ठिठुरती सर्दी के बाद का परिणाम या प्रसाद होता है।
जिस पर कि परिवार की आजीविका व जीवन निर्वाह आगामी फसल तक के लिए आशा का संबल होती है। परिवादी के पास जमाबंदी के अनुसार २ बीघा जमीन बताई गई जिसमें हुए नुकसान की कीमत प्रत्येक स्तर पर ५० की राशि का होना पत्रावली पर आया है।
यह था मामला
किसान किशनलाल ने परिवाद में बताया कि नवानिया गांव में उसका दो बीघा खेत है, बिना अनुमति विपक्षी के विद्युत निरीक्षक ने खेत में विद्युत लाइन व ट्रांसफार्मर स्थापित किया हुआ है। पड़ोस में सुंदरबाई व्यास के खेत में लाइन का एक पोल लगा हुआ है जो एक वर्ष पहले झुकने से उसके तार झूल गए। विपक्षी के कार्यालय में लिखित व ऑनलाइन शिकायते की लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया। ११ अप्रेल २०१७ को झूलते तार हवा के टकराने के कारण लगी चिंगारी से खेत में खड़ी गेहूं की फसल में आग लग गई।
आग से करीब ५० हजार की फसल व २० हजार के सूखला जल गया। ग्रामीणों ने अपने स्तर पर ही कुएं की मोटर चलाकर आग पर काबू पाया। इस संबंध में वल्लभनगर थाने में मामला दर्ज करवाया तथा हल्का पटवारी ने भी नुकसान का आकलन किया।
Published on:
22 Feb 2018 12:10 pm

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