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फूलों ने महकाई जिदंगी की फुलवारी

फूलों की बहार जिंदगी में भर रही सुनहरे रंगफूलों की खेती से किसान होने लगे मालामाल

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फूलों की बहार जिंदगी में भर रही सुनहरे रंग

फूलों की बहार जिंदगी में भर रही सुनहरे रंग

खेतों की क्यारी में लदकता पीला गेंदा तो लाल-गुलाबी गुलाब अब किसानों की जिंदगी महकाने लगे हैं। जिन फूलों की बिखरती खुशबू से मन खिल-खिल जाता है, उसी खूशबू ने इन धरतीपुत्राें की नई सोच और मेहनत को गांव-गांव शहर-शहर तक छितराना शुरू कर दिया है। इस बार होली पर कुछ ऐसे किसानों की कहानी जिन्होंने नई राह पर कदम बढ़ाया और अब तस्वीर बदलने लगी है।

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भुवनेश पंड्या

450 किसान जुट गए एक साथ फूलों की खेती में...सेवा मंदिर के कार्यक्रम समन्वयक कृषि राजेश सैन ने बताया कि सेवा मंदिर गत 4 वर्ष से किसानों को फूलों की खेती करने के लिए प्रेरित कर रहा है। खास तौर पर गेंदा व गुलाब की खेती की जा रही है। एक प्रोजेक्ट आया था, उसमें फूलों की खेती शामिल थी, जिससे आय बढ़ाने का उपाय बताया गया था, उसी की शुरुआत को अपनाते हुए गिर्वा के अलसीगढ़, राजसमन्द के खमनोर व देलवाड़ा में किसानों को इस खेती से जोड़ा। सभी गांवों में मिलाकर 450 किसान फूलों की खेती कर रहे हैं। इसमें अलसीगढ़ में 100, खमनोर व देलवाड़ा में 200 और राजसमन्द ब्लॉक में एमड़ी, खटामला, उम्मेदपुरा सहित करीब 10 गांवों के 150 किसान खेती कर रहे हैं। उनकी आय बदलने लगी है। अब वे एक सीजन यानी चार माह में औसत करीब 30 हजार और अधिकतम 1 लाख रुपए तक कमाने लगे हैं। इसका कारण उदयपुर, नाथद्वारा, कांकरोली, केलवा में बाजार उपलब्ध होना है। यहां व्यापारियों के माध्यम से इसे बाहर भी भेजा जा रहा है।

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1. पई में बनाई डेढ़ सौ बीघा की बगिया

पई निवासी राजेन्द्र खोखरिया और उनकी पत्नी पारू देवी ने बताया कि वह तीन साल से फूलों की खेती कर रहे हैं। गेंदा की खेती कर रहे हैं। डेढ बीघा में वह गेंदे की खेती कर रहे हैं। एक सीजन का करीब डेढ़ लाख रुपए की कमाई हो गई थी। राजेन्द्र रोजाना करीब 1 से डेढ़ क्विटंल फूल हाइवे पर देते थे, कही बाहर भेजने की जरूरत ही नहीं थी, उन्होंने स्थानीय बाजार भी तैयार किया, हाइवे पर लारी लगाकर आते-जाते वाहनों को बेचकर उन्होंने मुनाफा कमा लिया। ज्यादा कमाई दीपावली और नवरात्रि में होती है, जब फूल हाथों-हाथ निकल जाते है। सीजन में 100 रुपए और आम दिनों में 40 रुपए ऊपर राशि लेते है।

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रोजाना करीब 50 किलोग्राम निकालते हैं फूलन्यू आरटीओ के समीप लाल विहार निवासी डॉ. एमएल चांगवाल ने बताया कि करीब 8 बीघा में वे अलग-अलग प्रकार के फूलों की खेती कर रहे हैं। वह मूलत: किसान है, लेकिन वनस्पति विज्ञान में पीएचडी की है, जिसका फायदा वे खेती में भी लेते हैं। अभी भिलार्डिया, क्राइन्थेनियन जिसे गेंदा कहते है, ग्लेडूलस जो बुके तैयार करने में काम आता है, रजनीगंधा, मेरीगोल्ड, जिसे हजारी कहते हैं और गुलाब की खेती कर रहे हैं। वे कई वर्षों से फूलों की खेती कर रहे हैं। उनका कहना है कि 12 महीने फूलों की खेती की जाती है। प्रतिदिन 50 किलोग्राम अलग फूल निकालकर व्यापारियों को अनुबंध के तहत सप्लाई करते हैं, जिनमें गुलाब करीब दस किलोग्राम निकाला जाता है। गुलाब की कीमत प्रति किलोग्राम 60 और अन्य फूलों की 20 रुपए प्रति किलो है। प्रतिमाह आय करीब 50 हजार रुपए होती है, और त्योहारी सीजन में करीब एक लाख रुपया महीना कमा लेते हैं।

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अब हाइब्रिड बीज से बढ़ा मुनाफा

3. राजसमन्द जिले के एमडी गांव के नानालाल माली ने बताया कि अब वे हाइब्रिड बीज बोते हैं। चार साल से काम बढ़ाया है। अगस्त माह में गेंदों की खेती शुरू करते हैं, जो दीपावली तक चलती है। आधा बीघा में फूल बो रहे हैं, प्रत्येक तीसरे दिन करीब 30 किलोग्राम फूल निकाल लेते हैं। जो बीज बाजार में 15 रुपए तक उपलब्ध होता है, वह सेवा मंदिर से सस्ते में मिल जाता है। हम माला बनाकर देते हैं, तो करीब 30 हजार रुपए कमा लेते हैं, लेकिन यदि मंडी में फूल दे तो 20 हजार ही मिलते हैं।

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हम हर वर्ष किसानों को प्रशिक्षण देकर तैयार कर रहे हैं। इस बार समर मेरीगोल्ड, जिसे ग्रीष्मकालीन गेंदा कहते हैं उस पर फोकस है। किसानों को इस बार कोलकाता गेंदे के 5000 पौधों की रोप दी है। हमारा उद्देश्य है कि ज्यादा से ज्यादा किसान इस ओर प्रेरित होकर खुद की कमाई बेहतर कर सके।

डॉ लक्ष्मीनारायण महावर, प्रोफेसर, उद्यानिकी विभाग, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि, उदयपुर