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उदयपुर की फूड सेफ्टी लैब को मिला केमिकल टेस्ट में एनएबीएल एक्रिडेशन, प्रदेश में बनी तीसरी

- - रिपोर्ट की विश्वसनीयता बढ़ेगी- मिलावटियों की खैर नहीं

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उदयपुर की फूड सेफ्टी लैब को मिला केमिकल टेस्ट में एनएबीएल एक्रिडेशन, प्रदेश में बनी तीसरी

उदयपुर की फूड सेफ्टी लैब को मिला केमिकल टेस्ट में एनएबीएल एक्रिडेशन, प्रदेश में बनी तीसरी

भुवनेश पंड्या
उदयपुर. उदयपुर की फूड सेफ्टी लैब को केमिकल टेस्ट ने एनएबीएल (नेशनल एक्रिडेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड केलिब्रेशन लैब दिल्ली ) ने एक्रिडेशन दिया है, यानी अब किसी भी खाद्य सामग्री में किसी भी तरह की कोई केमिकल मिलावट है, और इसकी जांच के बाद लैब जो भी रिपोर्ट जारी करेगी वह दुनियाभर में मान्य होगी। यानी इस रिपोर्ट को कोई भी व्यक्ति आसानी से न्यायालय में चुनौती नहीं दे सकेगा। एक्रिडेशन मिलने के साथ ही उदयपुर की यह लैब जयपुर, अजमेर के बाद तीसरे स्थान पर आ गई है। इस एक्रिडेशन के बाद उदयपुर संभाग में किसी भी तरह के केमिकल की मिलावट करने वाले मिलावटियों पर शिकंजा कस गया है।

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एफएसएसएआई के निर्देश फूड सेफ्टी एण्ड स्टेटर्ड ऑथोरिटी ऑफ इडिया के निर्देश है, कि पूरी तरह से सटिक रिपोर्ट के लिए यह एक्रिडेशन जरूरी है। यह एक्रिडेशन मिलने के साथ ही संबंधित लैब की रिपोर्ट दुनिया के हर देश में मान्य होती है, क्योंकि आइएसओ इंटरनेशनल स्टेडर्ड ऑर्गेनाइजेशन, के तहत यह रिपोर्ट मानी जाती है। आइएसओ 17025/2017 के नियमों पर हम खरे उतर पाएंगे।

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तीन तरह के एक्रिडेशन

- फूड एनालिस्ट डॉ रवि सेठी ने बताया कि यह तीन तरह के होते है, इसमें से हमें फिलहाल केमिकल के लिए मिली है,लेकिन जल्द ही हमें इस्ट्रूमेंट की भी मिल सकेगी। इसका कारण है कि इस्ट्रूमेंट के लिए सरकार ने साढ़े सात करोड़ रुपए जारी किए है, इससे अमेरीका से मशीने राज्य स्तर से ही मंगवाई जाएंगी। इसके साथ ही लैब में ग्लास वेयर स्तरीय होने जरूरी है। आधारभूत सुविधाएं, सभी कार्मिक प्रशिक्षित, बेस्ट एनवायरमेंट, वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम व सेंपल लेने का सिस्टम भी देखा जाता है। माइक्राबायोलॉजी टेस्ट में एनएबीएल के लिए समय लगेगा। इसमें एयर टाइट कंटेनर की तरह कक्ष तैयार करने होते है। इसके लिए भी एक करोड़ रुपए जारी किए गए है। इसमें कांच के बॉक्स बनाने होते है, जहां टेस्ट होते हैं।

- केमिकल- मिल चुका है- इंस्ट्रूमेंट - तैयारी चल रही है।

- माइक्राबायोलॉजी- समय लगेगा

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- इंस्ट्रूमेंट के लिए अब ये तैयारी

- आइसीपीएमएस- इसमें मेटल्स की जांच हो सकेगी। जिसमें आयरन, कोबाल्ट, निकल, क्रोमियम, लैड सहित विभिन्न धातुओं की मात्रा पता कर सकेंगे।

- जीसीएमएस - किसी भी खाद्य सामग्री में क्या और कितना मिलाया है वह भी पता चल जाएगा। फैटी एसिड प्रोफाइल जांच कर सकेंगे।
- एलसीएमएस - खाने में प्रीजरवेटिव्स, एंटी ऑक्सीडेंट, आर्टिफिशियल स्वीटनिंग एजेंट, आर्टिफिशियल फ्लेवरिंग एजेंट की जांच हो सकेगी।

- एचपीएलसी- आर्टिफिशियल कलर्स की जांच हो सकेगी। - यूवी स्पेक्ट्रोफोटोमीटर- ये भी मिलावट जांच - आईआर- इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोफोटोमीटर- इससे तत्काल किसी भी केमिकल मिलाने पर उसके गु्रप की जानकारी मिल सकेगी।

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इससे हमारे लैब की रिपोर्ट सटिक रहेगी। हमारी जांच को वैश्विक मान्यता मिलना बड़ी उपलब्धि है। मिलावटियों को भी अब जरूरत पर कड़ा जवाब दे सकेंगे।

डॉ दिनेश खराड़ी, सीएमएचओ उदयपुर

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