
उदयपुर . जहां गाय का वास है वहां स्वयं गोपाल का वास होता है। गाय का महत्व प्राचीनकाल में तो था ही, पर वर्तमान युग में वैज्ञानिकों ने भी गाय से मिलने वाली हर वस्तु की उपयोगिता को स्वीकार किया है। यह बात 'कामधेनु धाम' नगर निगम प्रांगण में विश्व हिंदू परिषद गौ रक्षा विभाग द्वारा आयोजित गौ कथा के तीसरे और अंतिम दिन साध्वी अखिलेश्वरी ने कही। उन्होंने कहा कि हम अपनी केवल आस्था व संवेदनाएं प्रकट करके गौ रक्षा के लिए अपना मत प्रकट करते हैं। पर हम वहां प्रकट क्यों नहीं करते हैं जहां प्राकृतिक आपदा को छोड़कर किसी की भी लापरवाही के कारण स्वस्थ गौवंश की अस्वाभाविक मौत हो जाती है। यह हमारी नैतिक जिम्मेदारी होनी चाहिए कि हमने जिस गाय को दूध देने तक पाला उसे दूध न देने पर भी पालें। कुछ रुपयों के लिए कसाई अथवा गौ तस्करों को न बेचें। त्यौहारों पर गौपूजा करना या सेवा कर लेने से ही गौ रक्षा संभव नहीं। कथा का शुभारम्भ आयोजन समिति के संपतलाल माहेश्वरी, लक्ष्मण यादव, डॉ. धीरजप्रकाश जोशी, दिनेश भट्ट, अम्बालाल सनाढ्य ने व्यास पीठ का पूजन कर किया।
महाराणा प्रताप का बलिदान गौ रक्षार्थ साध्वी अखिलेश्वरी दीदी ने गौ रक्षार्थ बलिदानी महापुरुषों को याद करते हुए बताया कि महाराणा प्रताप गौ रक्षार्थ सिंह से युद्ध कर घायल हुए परिणामस्वरूप उन्होंने अपने प्राणोत्सर्ग किए, आज सम्पूर्ण विश्व में प्रताप के शौर्य की गाथाएं गूंज रही है। संविधान की धारा 48 में भी गौ संवर्धन एवं रक्षण की बात कही गई है। एेसे में सभी को गौ रक्षा के लिए आगे आना होगा। आजादी की क्रांति के सूत्रधार गौ सेवक मंगल पांडे अमर हुतात्मा मंगल पांडे को उनके शहीदी दिवस पर याद करते हुए दीदी मां ने बताया कि भारत की आजादी की क्रांति के सूत्रधार गौ पालक पंडित मंगल पांडे थे। भारतियों को अपमानित करने, गौ माता की चर्बी युक्त गोलियों के प्रयोग से अंग्रेजों ने नीचता की पराकाष्ठा की, उसके फलस्वरूप मंगल पांडे ने गौ माता के सम्मान में क्रांति का बिगुल बजा दिया, अंतत: अंग्रेजों को भारत छोडऩा पड़ा। गौ कथा श्रवण करने पधारे संत वृंद अंतिम दिवस की गौ कथा सुनने हरिहर आश्रम गुलाब बाग के महंत सुन्दरदास, धोलीबावड़ी रामद्वारा के महंत दयाराम, चांदपोल बड़ा रामद्वारा के महंत चेतनराम, संत संतराम भी कथा श्रवण के लिए आए।
Published on:
09 Apr 2018 04:15 pm
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