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गोगुंदा प्रधान के खिलाफ गवाहों से फिर बयान लेने पहुंची एएसपी.. बीडीओ से मारपीट एवं राजकार्य में बाधा का मामला

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crime in mau

मऊ में अपराध

डॉ. सुशीलसिंह चौहान/ उदयपुर. तत्कालीन विकास अधिकारी की कॉलर पकडऩे, मारपीट के प्रयास करने एवं राजकार्य में बाधा को लेकर गोगुंदा प्रधान पुष्कर तेली के खिलाफ दर्ज चर्चित मामले में परामर्श केंद्र प्रभारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक माधुरी वर्मा ने बुधवार को एक बार फिर गवाहों के बयान लिए। विशेष जाप्ते के साथ गोगुंदा थाने पहुंचीं एएसपी वर्मा ने मामले से जुड़े गवाहों के बयानों को एक बार फिर वेरीफाई करने की औपचारिकताएं पूरी की। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार ये लगातार तीसरा मौका है, जब पुलिस ने क्रमवार अधिकारियों को भेजकर आरोपी प्रधान के खिलाफ बयान लेने की कार्रवाई की है।
बता दें कि गोगुंदा के तत्कालीन विकास अधिकारी मनहर विश्नोई की ओर से १२ जनवरी को दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि सीसी सड़क निर्माण के विवाद को लेकर प्रधान पुष्कर ने ९ जनवरी को उनके राजकीय कक्ष में प्रवेश किया और अभद्रता करते हुए उनकी कॉलर पकड़ी। प्रधान ने मारपीट की कोशिश भी की। राजकार्य में दर्ज मामले को लेकर तत्कालीन थाना प्रभारी की ओर से गवाहों के बयान की रस्म पूरी की जा चुकी थी। इसके बाद गिर्वा के पुलिस उपअधीक्षक ओम राजपुरोहित ने भी गवाहों के बयान लिए थे। दोनों ही बयानों में गवाहों ने प्रधान के खिलाफ लगे आरोपों की पुष्टि की थी। लेकिन, मामले में अब तक पुलिस स्तर पर अदालत में चालान पेश नहीं किया गया, जबकि एक बार फिर गवाहों के बयानों को वेरीफाई कराने की प्रक्रिया शुरू की गई। पूर्व के दोनों पुलिस अधिकारियों की ओर से लिए गए बयानों की प्रति पुलिस स्तर पर विकास अधिकारी को भी उपलब्ध कराई गई थी।

यह भी हैं चर्चित मामले
- गोगुंदा थाना परिसर में घुसकर राजकार्य में बाधा डालने का मामला अदालत में विचाराधीन है। इस मामले में तत्कालीन थानाप्रभारी अमराराम मीणा परिवादी हैं।
- बजरी के अवैध परिवहन में लिप्त वाहनों को माइनिंग व बॉर्डर होमगार्ड की कार्रवाई में पकडऩे पर हुए विवाद के बाद विभाग स्तर पर राजकार्य में बाधा का मुकदमा दर्ज हुआ था।
- विकास अधिकारी की ओर से राजकार्य में बाधा डालने का मामला दर्ज कराया गया था, जिसमें अब तक चालान पेश नहीं हुआ है।
- आरटीआई कार्यकर्ता की शिकायत पर खनन विभाग ने गोगुंदा पंचायत समिति से जुड़ी ग्राम पंचायतों से लिखित में जवाब मांगा है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से बजरी खनन में प्रतिबंध लगाने के बाद से अब तक पंचायतों के स्तर पर कितनी बजरी का उपयोग लिया गया। ये बजरी कहां से प्राप्त हुई है, हालांकि अब तक पंचायतों की ओर से इस बारे में जवाब पेश नहीं हुआ है।

बयान किए वेरीफाई
पुराने प्रकरण में मेरी ओर से थाने में जाकर गवाहों के बयान वेरीफाई करने की प्रकिया हुई है। मेरे स्तर पर प्रधान से कोई बातचीत नहीं हुई है।
माधुरी वर्मा, एएसपी, परामर्श केंद्र उदयपुर