
18 वर्ष से पहले ही ले लिया लाइसेंस, फर्जी दस्तावेजों से कर ली सरकारी ड्राइवर की नौकरी, दो साल से मामले की जांच दबाए बैठा वन विभाग
जितेन्द्र पालीवाल @ उदयपुर. मुख्य वन संरक्षक कार्यालय में कार्यरत एक वाहन चालक के विरुद्ध फर्जी दस्तावेजों के जरिये करीब 33 साल से नौकरी का मामला पिछले दो साल से जांच के नाम पर फाइलों में दबाया जा रहा है। अब तो वह सेवानिवृत्ति के करीब है, लेकिन जांच पूरी नहीं हो रही है। आरोप है कि चालक ने 18 साल से कम उम्र में ही ड्राइविंग लाइसेंस जारी करवा लिया। यही नहीं, जिस स्कूल की अंकतालिका चयन के समय दी, उस स्कूल में चालक के पढऩे का कोई रिकॉर्ड ही नहीं है।
वर्ष 2013 में फोरेस्टर भर्ती के आवेदक महिपाल सिंह ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के महानिदेशक, वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव और मुख्य वन संरक्षक उदयपुर को शिकायत दी। इसमें बताया कि जगदीशप्रसाद नेहरा पुत्र धुकलराम निवासी नेहरों की ढाणी कोलसिया, नवलगढ़़ (झुंझुनूं) वर्तमान में मुख्य वन संरक्षक कार्यालय, उदयपुर में वाहन चालक के पद पर कार्यरत है। करीब दो साल पहले हुई शिकायत पर एसीबी के महानिदेशक कार्यालय ने २ अप्रेल, 2018 को वन विभाग के प्रमुख शासन सचिव को चिट्ठी लिखकर नेहरा के विरुद्ध विभागीय जांच के निर्देश दिए। एक सप्ताह बाद संयुक्त शासन सचिव ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय तथा मुख्य वन संरक्षक कार्यालय, जयपुर ने सीसीएफ कार्यालय उदयपुर से 27 अप्रेल, 2018 को जांच कर रिपोर्ट देने को कहा। इस मामले को तीन माह तक लटकाए रखने के बाद 26 जुलाई को सीसीएफ उदयपुर ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कोलसिया, तहसील नवलगढ़ (झुंझुनूं) से वर्ष 1980-81, 1982-83, 1983-84 को जारी आठवीं के परीक्षा परिणामों की छाया प्रति मांगी। जवाब में सात पेज की सूचना में कोलसिया स्कूल ने बताया कि 1981-82 में जगदीशप्रसाद नेहरा के यहां से आठवीं उत्तीर्ण होने और टीसी जारी करने सम्बंधी कोई रिकॉर्ड नहीं है। इस सत्र में रिकॉर्ड में नेहरा का नाम ही नहीं था। इधर, विभाग में तीन बार जांच अधिकारी बदले जा चुके हैं। पहले डीएफओ लायक अली, फिर नरेश चतुर्वेदी और अब नरपत सिंह चारण के पास जांच चल रही है। बीच में कुछ समय के लिए एक अन्य अधिकारी के पास जांच रही थी। मामला सामने आने के बावजूद विभागीय जांच पूरी नहीं हो पा रही है। इसे उदयपुर सीसीएफ कार्यालय दबा बैठा है।
लाइसेंस की भी जांच
सरकारी दस्तावेजों की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद सम्भागीय मुख्य वन संरक्षक कार्यालय ने संस्थापन शाखा को यूओ नोट जारी कर वाहन चालक की पहली नियुक्ति, नियमितीकरण, शपथ-पत्र, विभाग द्वारा दिए प्रशंसा-पत्र, स्कूल की मार्कशीट, टीसी एवं ड्राइविंग लाइसेंस के साथ ही तमाम दस्तावेज मांगे।
ये थे जांच के बिन्दु
ठ्ठ आवेदक नेहरा ने विभाग में नौकरी के लिए आठवीं पास की अंकतालिका लगाई, उस स्कूल में रिकॉर्ड ही नहीं है, तो
मार्कशीट कहां से आई?
ठ्ठ नेहरा को ड्राइविंग लाइसेंस 11 जून, 1982 को अलवर से जारी हुआ था, जबकि विभागीय रिकॉर्ड में उसकी उम्र 25 जून, 1966 लिखी हुई है। इस हिसाब से उसकी उम्र 15 साल, 11 माह और 17 दिन की होती है। चारपहिया और भारवाहक वाहन चलाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने के लिए 18 वर्ष की उम्र पूरी करना जरूरी है।
रिपोर्ट आ गई है, जयपुर भेजेंगे
जांच रिपोर्ट आ गई है, जो भी तथ्यात्मक जानकारी रिपोर्ट में आई है, वह जल्द ही मुख्यालय को भेज देंगे। आगे की कार्रवाई वहीं से होनी है।
बी. प्रवीण, मुख्य वन
संरक्षक, उदयपुर
Published on:
29 Jan 2020 12:39 pm
बड़ी खबरें
View Allउदयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
