कहीं किताबें नहीं, हैं तो गलतियों की भरमार, क्यूआर कोड में कंटेंट नहीं, पढ़े तो कैसे पढ़े बच्चें

कहीं किताबें नहीं, हैं तो गलतियों की भरमार, क्यूआर कोड में कंटेंट नहीं, पढ़े तो कैसे पढ़े बच्चें

Madhulika Singh | Publish: Jul, 20 2019 04:51:35 PM (IST) Udaipur, Udaipur, Rajasthan, India

हालात यह है कि जो किताबें पहुंची है उनमें क्यूआर कोड में कंटेंट तक अपलोड नहीं है। नवाचार के नाम पर प्रयोग किए गए क्यूआर कोड के बारे में भी पता नहीं है। अधूरी पहुंची किताबों मे गलतियां इतनी है कि बच्चे और शिक्षक इनको पढऩे से ज्यादा गलतियां ठीक करने में लगे हुए हैं। अब शिक्षकों को स्कूल में मोबाइल पर पाबंदी का फरमान जारी कर दिया है। कुल मिलाकर बिना तैयारी के आदेश जारी करने से ऐसे हालात बने, जिससे बच्चों की पढाई प्रभावित हो रही है।

चंदनसिंह देवड़ा उदयपुर. शिक्षा विभाग (Education Department) की हालत इन दिनों अजीब सी हो रही है। सरकार स्कूलों में प्रवेश बढ़ाने पर जोर देकर टारगेट पूरे करने का अल्टीमेटम तो दिया जा रहा है। लेकिन बच्चों के पास अभी तक पूरी किताबें ही नहीं पहुंची है। हालात यह है कि जो किताबें (Books) पहुंची है उनमें क्यूआर कोड में कंटेंट तक अपलोड नहीं है। नवाचार के नाम पर प्रयोग किए गए क्यूआर कोड के बारे में भी पता नहीं है। अधूरी पहुंची किताबों मे गलतियां इतनी है कि बच्चे और शिक्षक (Teacher) इनको पढऩे से ज्यादा गलतियां ठीक करने में लगे हुए हैं। अब शिक्षकों को स्कूल में मोबाइल पर पाबंदी का फरमान जारी कर दिया है। कुल मिलाकर बिना तैयारी के आदेश जारी करने से ऐसे हालात बने, जिससे बच्चों की पढाई प्रभावित हो रही है।s

फैक्ट -1 किताबें नहीं है
जुलाई का एक पखवाड़ा गुजर गया है, लेकिन जिले के अधिकांश स्कूलों में बच्चों को पूरी किताबें शिक्षा विभाग नहीं दे पाया है। आधी अधूरी किताबों से पढ़ाई नहीं हो पा रही है। अध्याय जोडऩे हटाने के चलते किताबों की प्रिंटिंग में देरी का हवाला दिया जा रहा है। हैरत की बात तो यह है कि जो विषय स्कूल में है ही नहीं उन स्कूलों में उसकी किताबें भेज दी गई। कई जगह तो नोडल केन्द्रों से स्कूलों में पुस्तकें नहीं भेजी गई।

फैक्ट -2 किताबों में गलतियों की भरमार
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने विज्ञान संकाय की जो किताबें प्रकाशित करवाई उसमें गलतियों की भरमार है। विज्ञान संकाय के छात्र गुरूजी से इनको सुधारने में लगे हुए हैं। स्थिति यह है कि इनके अलावा भी पहली से 10वीं तक की किताबों में खामियां सामने आ रही है। जिससे छात्रों को गलत और अधूरी जानकारियां मिलेंगी।

फैक्ट -3 कोड है तो कंटेट नहीं
पहली बार सरकारी स्कूलों की किताबों में क्यूआर कोड दिए गए ताकि शिक्षक इसे मोबाइल से स्केन कर विस्तृत जानकारी हासिल कर बच्चों को पढ़ाएं। यह नवाचार दिखावा साबित हो रहा है। बच्चों को तो छोड़ो, शिक्षकों को इस क्यूआर कोड के बारे में नहीं बताया गया। पड़ताल में पता चला कि कक्षा 9 और 10वीं गणित व विज्ञान की किताब के आलावा एक भी किताब का कंटेंट दीक्षा एप पर उपलब्ध ही नहीं है।

फैक्ट -4 डिजिटल पर जोर, मोबाइल पर पाबंदी
माध्यमिक निदेशक कार्यालय ने शिक्षकों के कक्षा में मोबाइल उपयोग पर रोक लगाने के आदेश जारी कर दिए। जबकि किताबों में क्यूआर कोड देकर डिजिटल लिटरेचर की सुविधा दे रहे हंै, तमाम विभागीय जानकारी इसी पर मांग रहे हैं फिर यह फरमान जारी कर क्या साबित करना चाह रहे है यह समझ से परे है। इसे लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही है।

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned