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जीएसटी ड्रामा: सुविवि में ऑडिट पेरा लगा था दो वर्ष पहले, वसूली के कदम उठाए तो आया उबाल

प्रधान महालेखाकार, सामान्य व सामाजिक क्षेत्र लेखा परीक्षा राजस्थान जयपुर ने लगाया था ऑडिट पेरा इसकी भरपाई के लिए प्रक्रिया शुरू हुई तो सामने आया विवाद

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मोहनलाल सुखाडिय़ा विवि में दो वर्ष पहले ये ऑडिट पेरा लगा था, जिसमें ये स्पष्ट किया गया था कि विश्वविद्यालय द्वारा दो साल में सम्बद्ध कॉलजों से जो सम्बद्धता शुल्क लिया गया उस पर जीएसटी लेना था, जिसे नहीं लिया गया, जीएसटी वसूल नहीं होने पर राज्य सरकार व केन्द्र सरकार को नुकसान हुआ है, इसे वसूल कर इसे जमा करें। 55.86 लाख की वसूली नहीं होने से सरकार को इस राशि का नुकसान हुआ है। सुविवि में दो वर्ष पहले 27.9.2019 को कार्यालय, प्रधान महालेखाकार, सामान्य व सामाजिक क्षेत्र लेखा परीक्षा राजस्थान जयपुर ने ऑडिट करने के बाद इस पर ये बिन्दु तय किया था।

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एक माह से अधिक समय तक रुकी थी टीमसुविवि में वर्ष 2019 में करीब एक माह से अधिक समय तक एजी ऑडिट टीम रुकी थी। तीन सदस्यीय टीम ने यहां सभी दस्तावेजों की जांच पड़ताल कर पुरानी रिपोर्ट से तुलना की थी। पिछली बार तैयार की गई रिपोर्ट में जो गलतियां थी उसे दूर करवाई गई। सुविवि के वित्त नियंत्रक दलपतसिंह राठौड़ ने बताया कि जो भी पेरा होता है उसे लगने के बाद रिप्लाई में संतुष्ट होने पर उसे ड्रॉप कर दिया जाता है। पहले कमियां बताई जाती है, तो उसे पाइन्ट कर विभाग को भेजा जाता है, मामला जितना बड़ा होता है उसी स्तर के अधिकारी तक इसकी जानकारी दी जाती है साथ ही एजी का भी उतना ही बड़ा या उसी स्तर का व्यक्ति इसे संतुष्ट होकर ड्रॉप करता है या हटवा सकता है। मामले की गंभीरता देखते हुए प्रमुख शासन सचिव को भी प्रकरण भेजा जाता है। विभागीय स्तर पर मासिक व त्रेमासिक बैठक होती है। इसमें गलतियों को ठीक करने, अधिक पैसा देने, रिकवरी, नियमों का पालन नहीं होने, स्कीम में पैसा नहीं देने जैसे विभिन्न वित्तीय मसलों पर बातचीत होती है, इसमें सुधार किया जाता है। एजी को तय बिन्दु की अनुपालना रिपोर्ट से संतुष्ट करने के बाद इसे ड्रॉप किया जाता है। अलग-अलग लेवल की ऑथोरिटी इसे ड्रॉप कर सकती है।

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ये था ऑडिट पेरा में ...

55 लाख 86191 रुपए की वसूली नहीं करने का बिन्दु आया सामनेमोहनलाल सुखाडिय़ा विवि द्वारा उपलब्ध करवाई गई सूचना में विश्वविद्यालय को एफिलेशन फीस इंकम वर्ष 2017-18 में राशि 9575374 की प्राप्ति व वर्ष 2018-19 में 2,28,77022 की प्राप्ति हुई। प्राप्त राशि पर उक्त नियमों के अनुसार जीएसटी की राशि 55.86 लाख रुपए की वसूली नहीं की गई। जिससे सरकार को इस राशि की प्राप्ति का अभाव रहा।

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ये था लेखा परीक्षा पर टिप्पणी में - इसके बाद ऐसे चलते रहे पत्र पर पत्र - उक्त एफिलेशन फीस पर जीएसटी की वसूली की गई है, यदि हां तो पूर्ण विवरण व अभिलेख उपलब्ध नहीं करवाए गए। - वर्ष 2018-19 में एफिलेशन फीस व जीएसटी की प्राप्त राशि का विवरण उपलब्ध नहीं करवाया गया। - सम्बद्धता श्ुाल्क पर जीएसटी की वसूली नहीं करने के कारण सरकार को 55.86 लाख रुपए प्राप्त नहीं हो सके। 27.9.2019 को लेखा परीक्षा की जारी टिप्पणी पर विवि ने 6.11.2019 को अवगत करवाया कि वर्ष 2017-18 व 18-19 में सम्बद्धता शुल्क की जीएसटी की राशि वसूल नहीं की गई, भविष्य में संबंधित महाविद्यालय से वसूली कर लेखा परीक्षा को अवगत करवाया जाएगा। प्रकरण में जरूरी कार्रवाई कर लेखा परीक्षा को अवगत करवाने के भी निर्देश दिए गए थे। - विवि द्वारा इस टिप्पणी पर रजिस्ट्रार ने 18 व 26 जून 2020 को ओदश जारी किए थे कि वित्त नियंत्रक के आदेश व महालेखा परीक्ष् ाा के आक्षेप पर कुलपति के निर्देशानुसार सभी सम्बद्ध माहविद्यालय को सत्र 2017-18 से सम्बद्धता शुल्क मय 18 प्रतिशत जीएसटी जमा करवाने का प्रावधान लागू किया जाता है। इस संबंध में सभी महाविद्यालयों को सूचित किया जाता है कि अपने संबंद्धता शुल्क सत्र 17-18 व 18-19 व 19-20 से मय की 18 प्रतिशत जीएसटी की राशि विवि में अविलम्ब जमा करवाए, अन्यथा महाविद्यालय की 20-21 की सम्बद्धता अभिवृद्धि नहीं की जाएगी।

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जमा नहीं हुआ तो मुद्दा जाएगा लोक लेखा समिति के पास यदि ये राशि समय पर जमा नहीं होती है, तो पूरा प्रकरण ड्रॉफ्ट पेरा के माध्यम से विधानसभा की लोक लेखा समिति के पास जाएगा। इसमें प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा विभाग को भी पूरी जानकारी है।

सीआर देवासी, रजिस्ट्रार एमएलएसयू