
उदयपुर . शहर के बीचोंबीच सबसे बड़ा ऑक्सीजन पॉकेट गुलाबबाग वेंटीलेटर पर है। इसे कोई संभालने वाला नहीं है। सुबह-शाम सैर के लिए आने वालों को बदहाली के नजारे साल रहे हैं। कई नेता और जनप्रतिनिधि गुलाबबाग से प्रेम रखते हैं, लेकिन इसकी सुध नहीं ली जा रही। सवाल पर नगर निगम ने टका सा जवाब दिया कि ठेके ही नहीं हुए हैं।
शिकायतों पर राजस्थान पत्रिका ने गुलाबबाग का रुख किया। सामने आया कि परिसर की बगिया में गाजर घास इस कदर फैल गई है कि बैठने लायक जगह भी नहीं बची। हालत यह है कि अब यहां नंगे पैर चलना भी दुश्वार है। गांधी प्रतिमा के पीछे बाग में फव्वारे हैं, लेकिन यह खेत का रूप ले चुका है। बच्चों की रेलगाड़ी के रास्ते, बर्ड पार्क होकर बाहर की तरफ आने वाले रास्ते पर सडक़ किनारे तक गाजर घास पसरी है। बारिश होने के बाद इस परिक्षेत्र में कीचड़ फैला रहता है। इसका स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सका है।
दूसरी ओर, बर्ड पार्क से पहले स्थित गार्डन में बच्चों के लिए खेल उपकरणों तक पहुंचना दुष्कर है। वहां पगडंडी ठीक नहीं है। कुछ झूले टूट-फूट चुके हैं। इस ओर भी गाजरघास ने कदम रोक रखे हैं। बता दें कि गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया का भी इस पार्क से लगाव है। पूर्व सभापति रवीन्द्र श्रीमाली के समय गुलाब बाग को संरक्षित-संवर्धित करने के कई प्रयोग किए गए थे।
गांधी प्रतिमा के पास
सरस्वती लाइब्रेरी के सामने गांधी प्रतिमा के पास के पार्क के दोनों ही तरफ के हिस्से खेतों में बदल गए हैं। गाजरघास इतनी बढ़ गई है कि दूब नजर ही नहीं आती।पार्क में अलग-अलग क्षेत्र की क्यारियां संभालने वाला भी कोई नहीं है। इस हिस्से को भी गाजर घास बदसूरत कर रही है। गुलाब की बाड़ी में भी स्थिति ऐसी ही है। असल में गुलाबबाग का मालिक तो पीडब्ल्यूडी है लेकिन लम्बे समय से इस उद्यान के रखरखाव की जिम्मेदार नगर निगम ने ले रखी है। नगर निगम ने इसके विकास के लिए बजट भी रखा लेकिन काम नहीं हो रहा है।
नियमित वॉक के लिए आने वालों का कहना है कि निगम गुलाबबाग के नाम पर बड़ा बजट हर साल रखती है, लेकिन इसे सहेजा नहीं जा रहा। समय पर ध्यान नहीं दिया तो यह बर्बाद हो सकता है। उधर, कमल तलाई पर भी बड़ा खर्च किया गया, लेकिन यह उस रूप में नहीं है, जैसी उम्मीद थी। टैंक में काई और बदबू के कारण कोई फटकना पसंद नहीं करता।
हां, यह बात सही है कि गुलाबबाग में सब चौपट स्थिति में है। इसका मुझे भी दु:ख है। मैंने निगम में सारी स्थिति बता दी थी। ठेके ही नहीं किए थे, जिससे स्थितियां खराब हो गईं। अब ठेके हो गए हैं तो सूरत सुधार दी जाएगी।
भगवान खारोल, अध्यक्ष, उद्यान समिति, नगर निगम
Updated on:
28 Sept 2017 04:26 pm
Published on:
28 Sept 2017 09:48 am
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