
'वाहो वाहो गोविंद सिंह आपे गुर चेला...
उदयपुर. गुरु गोविंद सिंह जयंती गुरुवार को श्रद्धा से मनाई गई। इस अवसर पर शहर के गुरुद्वारों में सुबह जहां अखंड पाठ का समापन हुआ, वहीं दिन और रात को विभिन्न स्थानों से आए रागी जत्थों ने शबद कीर्तन किया। गुरुद्वारों में दर्शन व लंगर के दौरान श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। इस खास मौके पर शहर में सिख कॉलोनी स्थित गुरुद्वारा सचखंड दरबार, शास्त्री सर्कल, सेक्टर-11, सेक्टर-14, प्रतापनगर सहित अन्य स्थानों पर स्थित गुरुद्वारों में चल रहे अखंड पाठ का समापन सुबह हुआ। इसके बाद स्थानीय व बाहर से आए रागी जत्थों ने शबद कीर्तन किए। गुरुद्वारों में सिख समाज के साथ ही अन्य धर्म के श्रद्धालुओं ने अरदास की व माथा टेका।
गुरुद्वारा सचखंड दरबार के प्रवक्ता रविन्द्र पाल सिंह कप्पू ने बताया कि सुबह 5.30 बजे से लंगर बनाने की सेवा शुरू हुई। वही सहज पाठ की समाप्ति सुबह 7.30 पर हुई। अध्यक्ष धर्मवीर सिंह सलुजा ने बताया कि पहले दीवान की समाप्ति 9.30 बजे हुई व दूसरा दिवान 10.30 से 11 बजे तक ज्ञानी अजीत सिंह केकथा से शुरू हुआ। उन्होंने गुरु गोविंद सिंह की जीवनी पर प्रकाश डाला। सुबह 11 बजे से 12 बजे तक उदयपुर के रागी जत्थे महेंद्र सिंह, इसके बाद दिल्ली के रागी जत्थे हरमित सिंह ने 12 से 1.30 बजे तक शबद कीर्तन से संगत को निहाल किया। इस दौरान रागी जत्थे ने 'वाहो वाहो गोविंद सिंह आपे गुर चेला..., मन चाव भया प्रभ आगम सुनेया...Ó आदि शबद से संगत को निहाल किया। सचिव दशनीत सिंह ने बताया कि उसके बाद गुरुद्वारा मे उत्कृष्ट सेवा करने के लिए जगदीप सिंह बग्घा व जसबीर सिंह चावला का सम्मान किया गया। अरदास के बाद संगत के लिए अटूट लंगर वरता। रात को बच्चों व इसके बाद रागी जत्थों ने रात 9 बजे से 11.30 बजे तक शबद कीर्तन किया। बाद में आतिशबाजी की गई।
गुरु अरजन दरबार सेक्टर 11 में भी आयोजन हुए। गुरुद्वारा प्रधान इंद्रजीत सिंह ने बताया दो दिन के अखंड पाठ की समाप्ति सुबह हुई। इसके बाद शबद-कीर्तन के दिवान सजे। दोपहर को 11.30 बजे दूसरा दिवान आरम्भ हुआ, इसकी समाप्ति 2 बजे हुई। देहरादून के रागी जत्थे ओमवीर सिंह ने संगत को शब्द कीर्तन से निहाल किया। करीब1000 संगत ने लंगर छका। वहीं शाम का दिवान 7 बजे शुरू हुआ, इसमें 4 से 8 वर्ष के बच्चों ने गुरबाणी व शब्द कीर्तन किया। इसके बाद सरबजीत सिंह व ओमवीर सिंह के रागी जत्थों ने शब्द कीर्तन किया। रात को शबद - कीर्तन की समाप्ति के बाद दूध व मठी के लंगर बरताए गए। इसके बाद आतिशबाजी की गई।
Published on:
02 Jan 2020 11:50 pm
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