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हरयाळो राजस्थान: तीन साल से पौधरोपण व प्रकृति संरक्षण के लिए प्रेरित कर रही जाह्नवी

पत्रिका के अभियान 'हरयाळो राजस्थान' से मिली प्रेरणा, सुबह से शाम तक पेड़ों की परवरिश में गुजरता हैं दिन

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पौधरोपण के लिए नर्सरी से पौधे लेती जाह्नवी

कमला शंकर श्रीमाली/कानोड़(उदयपुर). यूं तो पर्यावरण संरक्षण व पौधरोपण को लेकर सरकार हर वर्ष करोड़ों रुपए खर्च करती है। मगर, उनमें से कुछ ही देखरेख के चलते बच पाते है। राज्य में आमजन को पौधों का महत्व बताने व पर्यावरण संरक्षण को लेकर पत्रिका की ओर से हर वर्ष ''हरयाळो राजस्थान'' अभियान चलाया जाता है। इसी अभियान से प्रेरणा लेकर उदयपुर जिले के कानोड़ कस्बे के नई बावड़ी की रहने वाली 21 वर्षीय जाह्नवी त्रिवेदी पुत्री हेमंत त्रिवेदी ने खुद ग्रामीण अंचल में जाकर लोगों को पौधरोपण का महत्व बताने व पौधरोपण करने की ठानी। क्षेत्र को हरा-भरा बनाने व पेड़ लगाने का जुनून जाह्नवी के दिलों-दिमाग पर इस कदर सवार हुआ कि वह घर के सारे काम छोड़कर सुबह से पेड़ों की परवरिश करने, नए पेड़ लगाने व उनकी सुरक्षा करने निकल जाती है। वह अब तक 290 से अधिक पेड़ लगा चुकी है। जाह्नवी ने बताया कि पत्रिका के अभियान ''हरयाळो राजस्थान'' से प्रेरित होकर उसने करीब तीन वर्षों से इस मुहिम को जारी रखा हुआ है। पेड़ लगाने व उनकी परवरिश करने के कार्य में उसके परिवार ही नहीं अपितु अन्य भी सहयोगी बने हैं।

सुबह उठते ही पौधों की देखभाल के लिए घर से निकल जाती जाह्नवी

बारिश शुरू होते ही जाह्नवी सुबह उठते ही खुद कार लेकर नर्सरी जाती है और वहां से पौधे लाकर खड्डे खोदती और पौधरोपण करती है। इसके बाद ही वह भोजन करती है। जब तक वह पेड़ नहीं लगा देती, तब तक भोजन भी नहीं करती। जाह्नवी की मां माया त्रिवेदी भोजन के लिए उसे आवाज लगाकर थक जाती है, लेकिन वह एक की नहीं सुनती और पेड़ लगाकर ही आती है। जाह्नवी ने इस मुहिम को मजबूत करने व पेड़ लगाने के लिए स्कूल की प्राइवेट नौकरी भी छोड़ दी। हाल ही में वह वल्लभनगर विधायक उदयलाल डांगी की जनसुनवाई में भी पहुंच गई और विधायक से भी सहयोग की मांग की। जाह्नवी के प्रकृति प्रेम व चलाई जा रही मुहिम की विधायक ने भी प्रशंसा की और पूरे सहयोग का आश्वासन दिया।

किसी ने पेड़ को पहुंचाया नुकसान, तो छलक आते आंसू

बेटी जाह्नवी का लक्ष्य केवल पेड़ लगाना ही नहीं अपितु उसकी सुरक्षा दीवार मजबूत करना भी है। यानी ट्री-गार्ड है तो ही पौधरोपण किया जाता है। किसी पेड़ को कोई नुकसान पहुंचा देता है या पशु खा जाता है, तो जाह्नवी के आंसू छलक आते है और फिर से उसे पेड़ को सुरक्षित करने में जुट जाती है। जब तक वह पेड़ फिर से हरा-भरा नहीं होता, अपने जुनून को जारी रखती है। इस अभियान में सबसे बड़े सहयोगी जाह्नवी के दादा रामेश्वर लाल त्रिवेदी बने हैं। रिटायर्ड त्रिवेदी पोती के प्रकृति प्रेम से बेहद खुश हैं और पूरी मदद कर रहे हैं।

'ट्रीजयात्रा' फाउंडेशन के माध्यम से क्षेत्र को करना चाहती हैं हरा-भरा

जाह्नवी ने बताया कि उसने ट्रीज यात्रा फाउंडेशन को ग्लोबल वार्मिंग जैसी प्राकृतिक आपदाओं से बचाने, पक्षियों और छोटे जीवों को भोजन के लिए फलदार वृक्ष और नीड देने के लक्ष्य से बनाई। उसे इस यात्रा के आगामी लक्ष्य को बड़े रूप में करना है। 3 सालों तक कई स्थानों पर पौधरोपण करने के बाद उसने 2023 में इस वर्ष से प्लांटेशन एक सुनिश्चित ढंग से करने का निर्णय लिया। अब तक 290 से अधिक पौधे लगाकर उन्हें जिंदा रखकर उन्हें बड़ा करने का काम किया है।

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