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#sehatsudharosarkar उदयपुर के इन अस्पतालों में नाम की जननी सुरक्षा, जनाना के लिए नहीं पर्याप्त व्यवस्था

गर्भवतियों व बच्चों के लिए सुविधाएं कम, परेशानी ज्यादा

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उदयपुर. संभाग के सबसे बड़े राजकीय पन्नाधाय चिकित्सालय में जच्चा-बच्चा की देखरेख के लिए सभी संसाधन उपलब्ध हैं, लेकिन आपात काल में मरीजों को तत्काल उपचार मुहैया नहीं हो पाता है। ऐसे कई मौके भी आए हैं, जब गर्भवतियों ने अस्पताल परिसर में ही बच्चों को जन्म दे दिया। भर्ती आवेदन से लेकर जांच तक की जटिल प्रक्रियाओं एवं लम्बी लाइन के चलते महिलाओं को खासी परेशानी झेलनी पड़ती है। इतना ही नहीं सफाईकर्मी, वार्ड आया व अन्य स्टाफ की डांट-फटकार एवं दुत्कारें आम बात हैं जिसकी शिकायतों का पुलिंदा अस्पताल प्रबंधन के पास मौजूद है।


अस्पताल में प्रतिदिन 50-60 किलकारियां गूंजती हैं जिनमें से अधिकतर बच्चे कमजोर होने एवं अन्य कारणों के चलते बाल आईसीयू की नर्सरी में शिफ्ट किए जाते हैं। वहां जच्चा व बच्चा के अलग-अलग वार्ड में होने से परिजनों को खासी मशक्कत करनी पड़ती है। अस्पताल में तीमारदारों के लिए कोई व्यवस्था नहीं है, उन्हें रात में अस्पताल के गलियारों एवं बाहर खुले में सोना पड़ता है। सोनोग्राफी मशीन की कमी के चलते गर्भवतियों को घंटों कतार में इंतजार करना पड़ता है। कई बार तो महिलाएं गश खाकर गिर पड़ती है।

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स्त्रीरोग विशेषज्ञ का पद ही स्वीकृत नहीं: गुलाबसिंह शक्तावत सामु. स्वा. केन्द्र, भीण्डर

अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ का पद स्वीकृत नहीं है जिससे प्रसूताओं का पर्याप्त चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाती है। सिर्फ एक ही डॉक्टर व कम्पाउण्डर उपलब्ध है, जो प्रसूताओं व रोगियों की संख्या को देखते हुए नगण्य हैं। बच्चों के आईसीयू में सुविधा भी अपर्याप्त हैं। सोनोग्राफी मशीन उपलब्ध नहीं है जिससे प्रसूताओं को कई बार जांच के लिए उदयपुर रैफर करना पड़ता है। आस पास के गांवों से कई महिलाएं जांच के लिए आती है, लेकिन संसाधनों के अभाव में इन्हें मायूस लौटना पड़ता है।

आठ साल से डॉक्टर नहीं, तीमारदारों से दुव्र्यवहार: सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, झाड़ोल फलासिया

अस्पताल में गत आठ साल से डॉक्टर नहीं है। चिकित्सा के लिए आवश्यक उपकरण व अन्य पर्याप्त सुविधाओं का अभाव है। इसके चलते हर माह 20 से 25 महिलाओं को उदयपुर रैफर करना पड़ता है। इस अस्पताल में आस-पास के गांवों से बड़ी संख्या में प्रसूताएं जांच के लिए भी आती हैं, लेकिन उचित चिकित्सा सुविधा नहीं है। रात को रोगियों व प्रसूताओं के उपचार के लिए व्यवस्था नहीं है। स्टाफ रात को इलाज करने में आनाकानी करता है। तीमारदार के साथ अच्छा व्यवहार नहीं होता है। बच्चों के इलाज के लिए औसत सुविधाएं उपलब्ध हैं।

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