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उदयपुर में हेरिटेज वॉकश,10 साल में 10 कदम भी नहीं चली फाइल

उदयपुर में हेरिटेज वॉकश,10 साल में 10 कदम भी नहीं चली फाइल

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शहर की समृद्ध विरासत और संस्कृति को जानने के लिए अंदरुनी शहर में प्रस्तावित हेरिटेज वॉक की फाइल दस साल में दस कदम भी आगे नहीं बढ़ पाई है। जबकि स्मार्ट सिटी परियोजना में विकास कार्यों पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए हैं। पूर्व में इस हेरिटेज वॉक से पर्यटकों को शहर की विरासत और संस्कृति को देखने का अवसर मिलता था, लेकिन अभी पर्यटक अपने हिसाब से ही घूम रहे हैं, गाइड भी उन्हें आधी अधूरी जानकारियां दे रहे हैं। अनजान वर्तमान पीढ़ी को भी ऐतिहासिक स्थलों और सांस्कृतिक विरासत के सौंदर्य का पूरा ज्ञान नहीं हो पा रहा।
इस हेरिटेज वॉक के लिए पूर्व में जिला कलक्टर ने निगम आयुक्त को नोडल अधिकारी बनाया। आयुक्त को सर्वे कर रूट प्लान बनाने के साथ ही रिपोर्ट सौंपनी थी। अब तक यह रिपोर्ट नहीं सौंपी गई। आयुक्त की इस रिपोर्ट के बाद जिला कलक्टर को इस पर मुहर लगानी है और पर्यटन विभाग को लाइसेंसी गाइड उपलब्ध करवाने के साथ ही इसका प्रचार प्रसार करना है, लेकिन यह फाइल कागजों से ही बाहर नहीं आ पाई।
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पूर्व में यहां से संचालित थी हेरिटेज वॉक
पूर्व में हेरिटेज वॉक संचालित थी। भगवान जगन्नाथ के दर्शन के साथ ही यह जगदीश चौक होकर पर्यटकों को अंदरुनी शहर में पैदल घुमाया जाता था। पर्यटक लाल घाट जाकर पुराने मकान व हवेलियों को निहारने के बाद गणगौर घाट, बागोर की हवेली के पहुंचकर समस्त घाट की खूबसूरती का आनंद लेते थे। वहां से गडिय़ा देवरा होते हुए गणेशघाटी में पुरानी हवेलियों काे देखते हुए कंवरपदा स्कूल पहुंचते थे। इसके बाद घंटाघर होते हुए कसारों की ओल होकर वापस जगदीश चौक पहुंचते थे, लेकिन यह सब बंद हो गया। पर्यटकों को विरासत दिखाने के लिए हाल में स्मार्ट सिटी ने करोड़ों काम करवाए, लेकिन अब तक निगम इसे शुरू नहीं कर पाया।

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जैसलमेर, बीकानेर की तरह ही देख सकेंगे यहां की हवेलियां

शहर में स्मार्ट सिटी की ओर से कई विरासतों को संरक्षित किया जा चुका है। जो बची हुई है, उन्हें भी अब संरक्षित किया जा रहा है। राजस्थान में बीकानेर, जैसलमेर सहित कई ऐसे शहर हैं, जहां पर्यटक केवल हवेलियां देखने जाते हैं। उन पर्यटकों को उदयपुर की विरासत व यहां की हवेलियां दिखाने के लिए यह हेरिटेज वॉक शुरू करनी है।

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शहर में हेरिटेज वॉक शुरू करने का प्रयास अभी चल रहा है। यह शुरू होगी तो पर्यटक हमारी विरासत व संस्कृति से रूबरू हो सकेंगे। निगम बोर्ड में कुछ मार्ग पर हेरिटेज बोर्ड लगाने पर भी प्रस्ताव लिया गया है। इसके अलावा पुराने भवन व दरवाजों पर भी लाइट की व्यवस्था की जा रही है।

मदन दवे, अध्यक्ष, विरासत समिति, नगर निगम