
मधुलिका सिंह/उदयपुर . हिंदी अब केवल भारत तक ही सीमित नहीं रही है। इसने अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में अपनी जगह बना ली है। भारत में लगभग 50 करोड़ से अधिक लोग हिंदी बोलते हैं। वहीं, विश्व मेें अंग्रेजी, मंदारिन के बाद हिंदी सबसे ज्यादा बोले जाने वाली भाषा है। विश्व के 170 देशों में पढ़ी और पढ़ाई जाती है। ऐसे में टेक्नोलॉजी ने भी हिंदी भाषा का वर्चस्व समझते हुए इसे अपना लिया है। इन दिनों आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का जादू पूरी दुनिया में छाया हुआ है, ऐसे में एआइ भी अब हिंदी बोलने लगा है। हिंदी में काम करने की सुविधा दे रहा है। इस भाषा के जरिये अधिक से अधिक लोगों को अपने इस्तेमाल के लिए लुभा रहा है।
भाषिणी (राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन)
सरकार ने भाषिणी नामक पहल शुरू की है। यह एक क्राउड सोर्सिंग प्लेटफॉर्म है, जो लोगों को लगभग सभी भारतीय भाषाओं में अनुवाद और प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण में योगदान का अवसर देता है। भाषिणी उपयोगकर्ताओं को प्रशिक्षण डेटा के रूप में उपयोग करने के लिए अपनी बोली जाने वाली आवाज़ के साथ-साथ लिखित पाठ डेटा का योगदान की अनुमति देता है। इस डेटा का उपयोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मशीन लर्निंग सिस्टम के लिए किया जाता है। भाषिणी, राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन का एक हिस्सा है, जोकि भारतीय भाषाओं में प्रौद्योगिकी विकास कार्यक्रम के अंतर्गत शुरू किया गया है।
एआइ फॉर भारत
आइआइटी मद्रास ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है, जिसका नाम 'एआइफॉर भारत' है। इसके माध्यम से भारतीय सामाजिक और आर्थिक समस्याओं के समाधान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का प्रयोग किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय भाषाओं और सांख्यिकी के क्षेत्र में एआइ के उपयोग के लिए तकनीकी तंत्रज्ञान की सहायता प्रदान करना है।
जुगलबंदी
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए भारतीय भाषाओं के प्रयोग को विकसित करने में कुछ कॉर्पोरेट पहल भी की जा रही है। माइक्रोसॉफ्ट ने जुगलबंदी नामक एक जनरेटिव एआइ चैट बॉट विकसित किया है, जो हिंदी सहित कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद करने में सक्षम है।
टॉपिक एक्सपर्ट
हाल ही में जी-20 सम्मलेन में उपस्थित अमरीकी अधिकारी मार्गरेट मैकलियोड ने फर्राटेदार हिंदी में बात कर सबको चौंका दिया।सही मायनों में हिंदी भाषा के महत्व का अंदाज़ा आप इससे लगा सकते हैं कि हिंदी विश्व में तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। हमारे पास हिंदी के रूप में एक ऐसी सुंदर और सुदृढ़ भाषा है, जिसे हम एक सर्वव्यापी कनेक्टिंग लैंग्वेज के रूप में प्रयोग कर सकते हैं। यही कारण है कि एआइ तकनीक में भी अब हिंदी का प्रयोग होने लगा है। हिंदी जल्द ही एआइ और नवाचार में उपयोग की जाने वाली सबसे महत्वपूर्ण भाषाओं में से एक के रूप में उभरेगी।
- कौस्तुभ भट्टाचार्य, एआइ विशेषज्ञ
Updated on:
14 Sept 2023 10:39 pm
Published on:
14 Sept 2023 10:38 pm
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