
नरेंद्र मेनारिया/ खरसाण. वल्लभनगर तहसील के मेनारिया समाज का गांव खरसाण में हाेली कुछ अलग ही अंदाज में मनाई जाती है ।हाेली के दिन शुभ मुहूर्त में गांव का नंगारची गांव के मुख्य धूणी चौराहे पर आकर ढाेल बजाकर गांव के लाेगाें काे इकठ्ठा करता है। वहां से सभी जन हाेली चाैक में जाते हैं वहां पर पहले पटाखे की धूम मची हुई रहती है। गाँव के लाेग पूजा कर हाेली काे जलाते हैं । हाेली के उपर 4-5 क्विंटल लकड़ियां व कांटे डाले जाते हैं व बालिकाओं द्वारा गाेबर से बनाए हुए वडुलीये जिसमें गाेबर से हाेली के गहने बने हुए हाेते हैं वह पहनाते हैं उसके बाद पटाखों के साथ हाेली काे जलाते हैं । हाेली आधी जल जाती है उसके बाद मेनारिया समाज के युवा जलती हुई हाेली काे ताेड़ने का प्रयास करते हैं आैर गांव के लाेग जलती हुई हाेली में पटाखे फेंकते हैं इसी के बीच युवा हाेली काे ताेड़़ते हैंं फिर जैसे ही टूटती है हाेली उसके बाद युवा अपने इलाके में मे ले जाने का प्रयास करते हैं आैर ज्यादा बल वाले अपने इलाके में ले जाकर कुएं में डालते हैं, हाेली ताेड़ते समय कुछ युवक जल भी जाते हैं। हाेली काे ताेड़ने की परंपरा सालाें से चली आ रही है।
हाेली के दूसरे दिन सुबह गांव की सभी महिलाएं अपने अपने इलाके से समूह में आती है व गांव के आण वरली चाैक पर इकट्ठी होती है वहां से महिलाएं हाेली के पास जाती हैं आैर घर से लाए गए पानी से हाेली काे ठंडी करती है, साथ ही गांव में मटकियां बांधी जाती हैं आैर मटकी फाेड़ का आयोजन हाेता है।