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बेटियों के जन्म पर ना केवल पूरा गांव खुशियां मनाता है, बल्कि ढोल-नगाड़ों के साथ बेटियों के घर जश्न मनाने पहुंचता है। परिवारजन उन्हें खूब पढ़ाते हैं और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। समाज में बेटी बचाओ की ऐसी मिसाल दे रहा है मावली तहसील के अन्तर्गत खेमपुर ग्राम पंचायत का धारता गांव। गांव में होली के मौके पर होने वाली ढूंढोत्सव की परम्परा के माध्यम से बेटी बचाओ का संदेश दिया जाता है।
बेटी वाले घर से होती है ढूंढोत्सव की शुरुआत
गांववासियों के अनुसार होली पर यहां पर सामूहिक ढूंढोत्सव नहीं होता, बल्कि यहां गांव के सभी लोग जिन-जिन परिवारों में लड़की या लड़का होता है, जिनकी पहली होली है, वहां ढोल-नगाड़ों के साथ जाते हैं और हर परिवार में ढूंढोत्सव का कार्यक्रम पूरे गांववासियों के साथ मनाया जाता है। गांव के ज्यादातर लोग व्यवसाय के लिए बाहर रहते हैं, लेकिन होली के समय उन्हें गांव की ढूंढोत्सव परम्परा खींच लाती है। होली के समय ढूंढोत्सव के कार्यक्रम में सबसे पहले गांव में जिस परिवार में बेटी का जन्म हुआ होता है, जिसकी पहली ढूंढ होती है, उस घर से ही ढूंढोत्सव की शुरूआत करते हैं।
बेटी की लम्बी उम्र के लिए करते हैं प्रार्थना
धारता के भुवनेश आमेटा ने बताया कि सभी लोग ढोल-नगाड़ों के साथ वहां सबसे पहले जाते हैं। उस घर में जैसे उत्सव का माहौल हो जाता है। गांव वाले पीली मिट्टी से मांडना बनाते हैं, उस बेटी को, जिसकी प्रथम होली है उसके रिश्तेदार द्वारा गोदी में लेकर बैठाया जाता है, वो भी लड़की ही लेकर बैठती है। उसकी लम्बी उम्र के लिए सब प्रार्थना करते हैं। वहीं लड़की के परिवार द्वारा गांव के सभी लोगों को गुड़-मिठाई खिलाकर मुंह मीठा कराया जाता है।
Updated on:
06 Mar 2023 09:18 pm
Published on:
06 Mar 2023 09:17 pm
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