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RajasthanBudget: योजनाबद्ध तरीके से हो औद्योगिक विकास, तय हो अधिकारियों की जिम्मेदारी

बजट पूर्व चर्चा में बोले उदयपुर के उद्यमी, राजस्थान पत्रिका और फॉर्टी की परिचर्चा
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RajasthanBudget: योजनाबद्ध तरीके से हो औद्योगिक विकास, तय हो अधिकारियों की जिम्मेदारी

केंद्रीय बजट के बाद राज्य सरकार का बजट पेश होने वाला है। बजट पूर्व चर्चा में उदयपुर के उद्यमियों ने समस्याओं से अवगत कराने के साथ ही अपना विजन रखा। राजस्थान पत्रिका और फॉर्टी की परिचर्चा में उद्यमियों ने बताया कि उदयपुर में औद्योगिक विकास की अपार संभावनाएं हैं, जरुरत है तो योजनाबद्ध तरीके से विकास की। साथ ही नियमों की पेचीदगी में सुधार करने और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की जरुरत है।

किसने क्या कहा

उदयपुर की क्षमता की तुलना में औद्योगिक इकाइयां कम है। वजह औद्योगिक विकास की धीमी गति होना है। कई तरह के अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने में 6-6 माह लग जाते हैं। औद्योगिक विकास को लेकर नियम कई तरह के बने हुए हैं, लेकिन उनकी पालना उच्च स्तर पर नहीं होती। ऐसे में नोडल ऑफिस नियुक्त करने और उनकी जिम्मेदारी तय करने की जरुरत है। इंडस्ट्री के सेक्टर वाइज जोन बनाकर डेवलपमेंट करने की जरुरत है।

प्रवीण सुथार, चेयरमैन, फॉर्टी

जयपुर में सेज के माध्यम से औद्योगिक विकास को नया आयाम मिला। इसी तरह से उदयपुर में भी सेज की तरह विकास होना चाहिए। पिछली सरकार ने एमएसएमइ की सब्सिडी में कटौती कर दी थी, जिसे बढ़ाने की जरुरत है। गुजरात में हुए औद्योगिक विकास की तरह राजस्थान में भी प्रयास किए जा सकते हैं। इससे प्रदेश को काफी फायदा होगा। नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की भी अपार संभावनाएं उदयपुर में है।

चर्चिल जैन, जनरल सेक्रेटरी, फॉर्टी

-जीएसटी को लेकर बने नियम के अनुसार उद्यमी को पहले भुगतान करना पड़ता है, जबकि उत्पाद की बिक्री के काफी समय बाद पेमेंट मिलता है। ऐसे में उद्यमियों को काफी घाटा होता है। इसको लेकर नियम में बदलाव की जरुरत है। ऐसा होने पर बाजार में पैसा तेजी से रोटेड होगा, जिसका लाभ हर वर्ग को मिलेगा। एमएसएमइ सेक्टर को मिलने वाली सब्सिडी भी 3-3 साल तक नहीं मिलती, सुधार की जरुरत है।

मनीष भाणावत, संभागीय अध्यक्ष, फॉर्टी

किसी भी तरह का उद्योग लगाने की स्थिति में उसकी लाइसेंस फीस, रिको की लीज फीस आदि काफी ज्यादा होती है। औद्योगिक विकास की दृष्टि से फीस में कमी लाने की जरुरत है। रीको की ओर से तमाम तरह की फीस ली जाती है, लेकिन आवश्यक सुविधाएं मुहैया नहीं करवाई जाती। जैसे की ड्रेनेज सिस्टम सही नहीं है। सड़कें, रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। ऐसे में विभागीय कार्मिकों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

आनन्द शर्मा, ट्रेजरार, फॉर्टी

प्रदेश में बिजली दरें काफी ज्यादा है, वहीं बिजली की उपलब्धता भी नाकाफी है, जबकि तमाम तरह के उद्योग बिजली पर निर्भर करते हैं। ऐसे में ऊर्जा प्रबंधन की काफी जरुरत है। उद्योगों को रात को बिजली इस्तेमाल करने पर मिलने वाली छूट को भी निगम बंद करना चाहते हैं, जबकि यह बिजली आपूर्ति संतुलन की दिशा में जरुरी है। बिजली आपूर्ति को लेकर नियम और सुविधाओं में काफी सुधार करने की गुंजाइश है।

इंद्रकुमार, एक्जीक्यूटिव मेंबर, फॉर्टी