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शहर में इतना कि बच जा रहा, गांवों में हालात यह कि कम पड़ रहा, क्या है यह चीज, पढ़े खबर

अन्नपूर्णा दूध वितरण योजना के तहत सरकारी स्कूलों में बच्चों को दूध पिलाने के लिए जो बजट वितरित किया जा रहा है, वह शहरों में तो बच रहा है जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में कम पड़ रहा है।
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उदयपुर

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chandan deora

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Updated: 1 May 2019, 12:00 PM IST

चन्दनसिंह देवड़ा/उदयपुर . जिले के स्कूलों में रोजाना 48 हजार लीटर दूध की खपत हो रही है। मार्च तक बांटे गए बजट में से गिने-चुने शहरी स्कूलों को छोडक़र अधिकतर में राशि पड़ी हुई है जबकि ग्रामीण स्कूलों को मांग के अनुरूप बजट समय पर नहीं मिल रहा है। ऐसे में यह सवाल खड़ा हो रहा है कि शहरी स्कूलों के बच्चे दूध के प्रति रुचि नहीं दिखा रहे हैं या व्यवस्था की खामी है जिससे बजट खर्च नहीं हो पा रहा है।


शहर में साढ़े नौ हजार बच्चे
पोषाहार योजना के अनुसार उदयपुर शहर में 86 स्कूल हैं जहां पर अन्नपूर्णा दूध वितरण होता है। इससे साढ़े नौ हजार बच्चे लाभांवित किया जाना है। इन स्कूलों के पास पहले जारी किया बजट भी शेष पड़ा हुआ है। इधर, 22 मार्च को इनको 17 लाख रुपए का बजट और जारी किया गया। दूसरी ओर, ग्रामीण क्षेत्र के 3800 स्कूलों में बजट कम पड़ रहा है। उल्लेखनीय है कि जिले में इस योजना के तहत 3 लाख 79 हजार बच्चे दूध पीते हैं।


दूध वितरण में शहरी स्कूलों का बजट क्यों शेष रह रहा है, इसकी समीक्षा के लिए 3 मई को बैठक बुलाई है। बच्चों को रोजाना तय मात्रा में पिलाना अनिवार्य है। ग्रामीण स्कूलों में बजट की मांग ज्यादा है जो किस्तों में दी जा रही है। - गौरीशंकर, प्रभारी, मिड डे मिल