
शिक्षकों ने बदल दी इस सरकारी स्कूल की सूरत, बच्चे चुटकियों में रच देते हैं कहानी-कविताएं
चंदनसिंह देवड़ा/उदयपुर. प्रतिभाओं की कमी नहीं है जरूरत है उन्हें तराशने की। अगर प्रोत्साहन मिल जाए तो प्रतिभाएं आगे सामने आती ही है।
ईसवाल के निकट पहाड़ी तलहटी के पास रेबारियों की ढाणी स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय के बच्चे इतने मेधावी है कि चुटकियों में कहानी एवं कविताएं रच देते हैं। प्रतिभाओं को तराशने में शिक्षकों की भी अहम भूमिका है। स्कूल के बरामदे से लेकर दीवारों पर महापुरुषों की जीवनियां और होनहार बालकोंं की तस्वीरें लगी है। जिले के बडग़ांव ब्लॉक के विद्यालय की सूरत और यहां की बाल प्रतिभाएं निजी विद्यालयों को भी पीछे छोड़ रही है। पढऩे के साथ ही इस विद्यालय के बच्चे साहित्य और कला में इतने पारंगत है कि इन्हें केवल एक शब्द देने पर ये चुटकियों में आपको कहानी और कविता की रचना कर सुना देते हैैंैं।
खेल खेल में बन रहे हुनरबाज...
विद्यालय के बच्चों को शिक्षक भूपेन्द्र पालीवाल समूह में बिठाकर उन्हें रोचक अंदाज में साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में हुनरबाज बना रहे हैं। दूसरे शिक्षक भी इसी तरह बच्चों को हाजिर जवाबी बना रहे हैं। स्टाफ ने लक्ष्य लिया है कि विद्यालय में पहली का प्रत्येक बच्चा अंग्रेजी और हिंदी पढऩे में पारंगत हो।
ग्रामीणों ने बना दिया हाईटेक स्कूल
शिक्षकों की मेहनत से इस विद्यालय से पिछले 5 सालों में 8वीं बोर्ड में अच्छे प्रतिशत लाकर 5 बच्चे जिला स्तर पर लेपटॉप जीत चुके है। 176 बच्चों के नामांकन पर 8 शिक्षक एवं एक प्रधानाध्यापक लगे हुए हैं। सरकार की ओर से इस विद्यालय में कम्प्यूटर लेब स्थापित नहीं की गई है लेकिन विद्यालय प्रशासन ने ग्रामीणों और भामाशाहों की मदद से कम्प्यूटर लेब बना दी। बच्चों के क्लास रूम में फर्निचर, सीसीटीवी कैमरे, प्रोजेक्टर, इन्वर्टर, अनाउंसमेंट के लिए माइक लगे हुए हैं। आरओ वाटर, शौचालय के बेहतर संसाधन जुटा रखे हैं।
इनका कहना..
उदयपुर के इस विद्यालय का निरीक्षण करने का मौका मिला। ‘कहानीकार’ बच्चों की प्रतिभा और पढ़ाई का माहौल बहुत अच्छा लगा। इस तरह की गतिविधियां अन्य विद्यालयों में भी हो सकती है।
प्रमोद चिमोली, निदेशालय, बीकानेर
विद्यालय के सभी शिक्षक बच्चों के साथ खूब मेहनत करते हंै। पढ़ाई के साथ बच्चों का दिमागी विकास करने के लिए इस तरह की गतिविधियां संचालित करते हैं। भामाशाहों को प्रेरित करने के साथ शिक्षक स्वयं आर्थिक सहयोग करते हैं, जिससे संसाधन जुटाए हैं।
पुष्पकांत व्यास, प्रधानाध्याक, राउप्रावि रेबारियों की ढाणी
Updated on:
2 Oct 2019, 1:45 PM IST
Published on:
2 Oct 2019, 1:43 PM IST
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