1 नवंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Udaipur Inspirational Story: बेटी ने पिता को जिंदगीभर का तोहफा देकर पेश की मिसाल, पूरा परिवार हो गया भावुक

Liver Transplant Unique Case: उदयपुर से सामने आई यह कहानी एक बेटी के साहस, त्याग और अपने पिता के प्रति अटूट प्रेम की मिसाल बन गई है। आरती कलाल ने अपने पिता को लिवर दान कर उन्हें नई जिंदगी दी। बेटी के इस फैसले से पूरा परिवार भावुक हो गया।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

उदयपुर

•

image

Akshita Deora

•

Updated: 4 Apr 2026, 1:30 PM IST

Father-Daughter Bond

पिता के साथ बेटी की फोटो: पत्रिका

Human Angle Story: मेवाड़ की धरती से एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने बेटियों के साहस, संस्कार और समर्पण की नई मिसाल कायम कर दी। उदयपुर जिले के चणावदा परसाद निवासी आरती कलाल ने अपने पिता ललित कलाल को लिवर दान कर उन्हें नई जिंदगी दी है। यह केवल एक चिकित्सकीय प्रक्रिया नहीं बल्कि बेटी के अपने पिता के प्रति अटूट प्रेम और जिम्मेदारी का ऐसा उदाहरण है, जिसने समाज में बेटियों के जज्बे को नई पहचान दी है।

ये है मामला

ललित कलाल लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही थी। परिवार के लिए यह समय बेहद कठिन था। कई बार इलाज करवाने के बावजूद स्वास्थ्य में ज्यादा सुधार नहीं हो रहा था। डॉक्टरों ने विस्तृत जांच के बाद स्पष्ट कर दिया कि उनकी जान बचाने के लिए लिवर ट्रांसप्लांट ही अंतिम विकल्प है। यह खबर सुनते ही परिवार के सामने चिंता की स्थिति बन गई।

परिवार में जब इस विषय पर चर्चा हुई तो बेटे और बेटी दोनों ने ही पिता को लिवर देने की इच्छा जताई। लेकिन बेटी आरती ने दृढ़ता के साथ कहा कि वह ही अपने पिता को लिवर देगी। बेटी के इस फैसले ने परिवार को भावुक कर दिया। एक ओर माता-पिता को बेटी की चिंता थी, वहीं दूसरी ओर उसके आत्मविश्वास और साहस ने पूरे परिवार को उम्मीद की नई किरण दी।

इसके बाद डॉक्टरों की टीम ने आवश्यक जांच की और आरती लिवर डोनेट करने के लिए उपयुक्त पाई गई। चिकित्सकों की देखरेख में लिवर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी हुई। ऑपरेशन के बाद पिता ललित कलाल की सेहत में धीरे-धीरे सुधार होने लगा। डॉक्टरों ने भी इस सफल ट्रांसप्लांट को सकारात्मक उदाहरण बताया है।

बेटी के जज्बे को सलाम

आरती कलाल के इस साहसिक निर्णय की चर्चा पूरे मेवाड़ और वागड़ क्षेत्र में हो रही है। जिसने भी इस घटना के बारे में सुना, उसने बेटी के इस जज्बे को सलाम किया। लोगों का कहना है कि यह केवल एक परिवार की कहानी नहीं बल्कि समाज के लिए प्रेरणा है कि बेटियां भी परिवार के लिए किसी भी त्याग से पीछे नहीं रहतीं। इस प्रेरणादायक घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि बेटियां केवल परिवार की जिम्मेदारी ही नहीं निभातीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर अपने माता-पिता के जीवन की सबसे बड़ी ताकत भी बन जाती हैं।