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कमाई का खूनी खेल : बीमा के फर्जीवाड़ा का खेल देख कंपनियों के मुख्यालयों से आए अधिकारी भी चौंके

बीमा कंपनियों के मुख्यालयों से अधिकारियों की टीमों ने भी यहां आकर डेरा डाल दिया है।

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माेे. इल‍ियास/ उदयपुर . आदिवासियों का बीमा करवा कर क्लेम उठाने के फर्जीवाड़े का खुलासे होने के बाद अब संबंधित बीमा कंपनियों के मुख्यालयों से अधिकारियों की टीमों ने भी यहां आकर डेरा डाल दिया है। वे भी बीमे के नाम पर फर्जीवाड़े को देखकर चौंक गए। कई बीमा मामले सीधे ही स्वीकृत कर क्लेम राशि डाली गई तो कई में न्यायालय के माध्यम से उठी। अधिकारी दोनों प्रकार के मामलों को अलग-अलग निकालते हुए अधिकारियों व कर्मचारियों की लिप्तता को टटोल रहे है। न्यायालय में हुए बीमे में अपील के लिए उन्होंने अधिवक्ताओं से भी सम्पर्क साधा है। इधर, फरार आरोपितों का अभी पता नहीं लगा।
पुलिस का कहना है कि बैंक व बीमा कंपनियों से रिकॉर्ड मांगने के दौरान स्थानीय कर्ताधर्ताओं ने गुमराह करते हुए आधा-अधूरा रिकॉर्ड दिया। इस पर एजेन्ट व संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत व घोर लापरवाही को पूरा चिट्ठा संबंधित कंपनियों के मुख्यालयों को भिजवाया गया। लाखों रुपए के फर्जी बीमा क्लेम को देखकर मुख्यालयों के अधिकारियों की नींद उड़ गई। कई अधिकारी यहां उदयपुर कार्यालय में पहुंच गए। वे पुलिस व अधिवक्ताओं से सम्पर्क कर मामले की पूरी पड़ताल में जुटे हैं। उन्होंने अपने स्तर पर कंपनियों के रिकॉर्ड को टटोला तो स्वयं ने गलतियों स्वीकार की। अधिकारियों ने खुद माना है कि लक्ष्य पूरा करने के लिए सर्वे से लेकर फर्जी कागजों को भी नजर अंदाज किया गया है। बीपीएल के ठप्पे लगे होने के बाद भी लाखों के बीमे किए गए, जो गलत हैं। गौरतलब है कि राजस्थान पत्रिका ने गत 30 मार्च के अंक में जिनके खाने के लाले उनके नाम पर उठा लाखों का बीमा क्लेम शीर्षक से खबर प्रकाशित कर इस फर्जीवाड़े का खुलासा किया था।

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अब ऑनलाइन मिलेगी मुकदमे की जानकारी
उदयपुर . मुवक्किल व अधिवक्ता अब नाम, मुकदमा व एफआरआई नम्बर के जरिये अपने मुकदमे के बारे में ऑनलाइन जानकारी ले सकेंगे। ई-कोर्स प्रोजेक्ट के तहत न्यायालय में एक कियोस्क में मशीन लगाई गई है। इस मशीन के माध्यम से वकील व मुवक्किल मुकदमे की जानकारी यथा किस स्तर पर है, कौन से न्यायालय, पेशी कब है..के बारे में जान सकेंगे। यह कियोस्क पीसीपीएनडीटी कोर्ट बरामदा परिसर में लगाया गया है।