
जगदीश मंदिर में लगे ड्रेसकोड के पोस्टर, देवस्थान बेखबर,जगदीश मंदिर में लगे ड्रेसकोड के पोस्टर, देवस्थान बेखबर
उदयपुर. शहर में करीब 400 साल पुराने जगदीश मंदिर में ड्रेसकोड को लेकर लगा पोस्टर चर्चा का विषय बन गया है। मंदिर से जुड़ी विभिन्न समितियों की ओर से तय किया गया है कि जगदीश मंदिर में छोटे कपड़े पहनकर प्रवेश पर रोक रहेगी। इसके लिए कई जगहों पर पोस्टर और बैनर लगाए गए हैं। मामले में जिम्मेदार महकमा देवस्थान अनजान बना हुआ है।
आस्था के साथ ही पुरातात्विक महत्व के जगदीश मंदिर को देखने के लिए देश-दुनिया से पर्यटक आते हैं। जिनके शॉर्ट टी शर्ट, शॉर्ट जिंस, बरमुडा, मिनी स्कर्ट, नाइट सूट पहनकर आने वालों को प्रवेश नहीं मिलेगा। इसके पक्षधर लोगों का कहना है कि लंबे समय से श्रद्धालु मांग करते रहे हैं। ऐसे में धर्मोत्सव समिति, रथयात्रा समिति, पुजारी परिषद की बैठक में निर्णय लेकर पोस्टर लगाए।
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यह लिखा गया है पोस्टर में
पोस्टर 'सभी भक्तों को सूचित किया जाता है कि जगदीश मंदिर परिसर में शॉर्ट टी शर्ट, शॉर्ट जींस, बरमुडा, मिनी स्कर्ट, नाइट सूट पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। कृपया इस नियम का ध्यान रखें। ऐसा नहीं करने पर मंदिर में प्रवेश वर्जित है। प्रिंटआउट कई जगह पर चस्पा किए गए हैं। जिन पर विदेशी भाषा में भी मैसेज लिखे हैं।
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बोहरा गणेश मंदिर में भी
जगदीश मंदिर के साथ ही शहर के प्रमुख गणपति मंदिर बोहरा गणेशजी में भी बीते दिनों इसी तरह के पोस्टर चस्पा किए गए। इसको लेकर सोशल मीडिया पर बहस चल पड़ी है, जिसमें अन्य मंदिरों में भी नियम लागू करने की पैरवी की गई है। मेवाड़ के मंदिरों में इस तरह के नियम लागू करने का संभवतया यह पहला मामला है।
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मंदिर में चेंजिंग रूम बनाने की बात
मंदिर समिति से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि समिति की ओर से मंदिर में चेंजिंग रूम बनाए जाएंगे। इनमें धोती-जब्बा, साड़ी आदि की व्यवस्था की जाएगी। भूलवश कोई व्यक्ति शॉर्ट कपड़ों में मंदिर पहुंचता है तो उसके लिए सुविधा रहेगी। किसी को दर्शन में परेशानी नहीं हो, इसका प्रबंध किया जाएगा।
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इनका कहना...
देवस्थान विभाग की ओर से जगदीश मंदिर में किसी प्रकार का पोस्टर नहीं लगाया गया है। ना ही राज्य सरकार से इस प्रकार के किसी तरह के निर्देश प्राप्त हुए हैं। विभागीय टीम भेजकर जांच करवाई जाएगी।
जतीन गांधी, सहायक आयुक्त, देवस्थान
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जनभावना के अनुसार पोस्टर लगाया है। छोटे कपड़े पहनकर प्रवेश नहीं करना चाहिए। अंग प्रदर्शन और अमर्यादित रहन सहन से धार्मिक भावनाएं आहत होती है। प्रवेश के नियम होने चाहिए।
दिनेश मकवाना, अध्यक्ष, धर्मोत्सव समिति
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पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव के कारण परंपराओं का निर्वहन नहीं हो पा रहा है। कई लोग अमर्यादित कपड़े पहनकर मंदिर में प्रवेश करते हैं। ऐसे में यह नियम धार्मिक मर्यादाओं को बनाए रखने के लिए सही है।
गजेंद्र, पुजारी, जगदीश मंदिर
Published on:
05 Jul 2023 10:37 pm
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