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जलझूलनी एकादशी पर मंदिरों से निकली रामरेवाडि़यां

गूंजे छोगाला छैल के जयकारे

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जलझूलनी एकादशी पर मंदिरों से निकली रामरेवाडि़यां

जलझूलनी एकादशी पर मंदिरों से निकली रामरेवाडि़यां

उदयपुर . जलझूलनी एकादशी पर सोमवार को शहर के विभिन्न मंदिरों से शाही लवाजमे के साथ ठाकुरजी के बैवाण निकले। ठाकुरजी को नए जल से स्नान करवाया गया।शहर के जगदीश मंदिर, मीठारामजी मंदिर सहित कई मंदिरों से भगवान की रामरेवाडि़यां अखाड़ों के साथ पिछोला के गणगौर घाट पहुंची, जहां पर सालिगरामजी को नए जल से स्नान करवाया गया। इसके बाद रामरेवाड़ी में बिराजित ठाकुरजी की घाट पर आरती कर झुलाया गया। बाईजी राज कुंड पर ठाकुरजी को नौका विहार करवाया गया। आयड़ क्षेत्र के मंदिरों से निकलने वाली रामरेवाडि़यां गंगोद्कुंड पर पहुंची , जहां ठाकुरजी को स्नान करवाया गया।गौरतलब है कि जलझूलनी एकादशी को पद्मा एकादशी, डोल ग्यारस और परिवर्तनीय एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। जलझूलनी एकादशी पर भगवान विष्णु अपने शयन के दौरान करवट बदलते हैं। इसी दिन माता यशोदा ने भगवान श्रीकृष्ण के कपड़े भी पहली बार धोये थे। जलवा पूजन, सूरज पूजन या कुआं पूजन का विधान है, जो इसी दिन हुआ था। यह पर्व उसी का एक रूप है। शाम को भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा को झांकी के रूप में मन्दिर के नजदीक जलस्रोत पर ले जाया जाता है, जहां उन्हें स्नान करवाते हैं एवं वस्त्र धोते हैं और उनकी पूजा-अर्चना की जाती है।