
मदनसिंह राणावत/झाड़ोल. आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र झाड़ोल का तहसील कार्यालय। क्षेत्र में निवासरत जनता के राजस्व सम्बन्धित काम और जनकल्याणकारी योजनाएं का पूरा लाभ नहीं दे पा रहा है। वजह ये कि यहां न तहसीलदार है न नायब तहसीलदार। महज एक फलासिया के नायब तहसीलदार के भरोसे पूरा उपखंड क्षेत्र है। जिसमें एक तहसील, एक उपतहसील और 59 पटवार मंडल आते हैं। स्वाभाविक है, यहां प्रतिदिन पहुंचने वाले ग्रामीणों के कामकाज नहीं हो पा रहे हैं।
कैसे चले योजनाएं
तहसीलदार के पास राजस्व कामों के साथ कई योजनाओं के प्रभारी का चार्ज, सामाजिक अंकेक्षण प्रभारी, ग्राम सभा प्रभारी, पण्डित दिनदयाल योजना, जनसुनवाई सम्बन्धित कई प्रकार की योजनाओं की प्रभावि क्रियान्विति नहीं हो पा रही है। ग्रामीणों को योजनाओं से लाभान्वित नहीं हो पा रहे हैं।
ये काम भी प्रभावित
पंजीयन सम्बन्धित, विभिन्न प्रमाण पत्रों को सत्यापित, पटवार मण्डलों का निरीक्षण, मासिक बैठक, शिविरों में एक ही अधिकारी होने से फलासिया पंचायत समिति अन्तर्गत आयोजित शिविरों में राजस्व सम्बन्धित काम न के बराबर हो रहे हैं।
इनका कहना...
सरकार आदिवासी क्षेत्र से साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। रिक्त पद होने से किसानों समेत ग्रामीणों के कई काम समय पर सम्पादित नहीं हो रहे हैं।
हीरालाल दरांगी, विधायक, झाड़ोल
रिक्त पदों को भरने को लेकर मैंने लिस्ट बना रखी है। विधानसभा सत्र के बाद रिक्त पदों को भरने को लेकर सरकार से मांग की जाएगी।
गुणवन्तसिंह झाला, देहात जिलाध्यक्ष, भाजपा
फलासिया और झाड़ोल दोनों का चार्ज मेरे पास ही है। सप्ताह में कभी यहां तो कभी वहां बैठता हूं। कोई दिन तय नहीं है। जहॉ ज्यादा काम होता है, वहां जाता हूं।
ओमप्रकाश सोनी, नायब तहसीलदार, फलासिया
Published on:
27 Feb 2018 05:27 pm
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