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सौर मंडल का सबसे बड़ा ग्रह 'बृहस्पति' या जूपिटर पृथ्वी के सबसे नजदीक आ रहा है। करीब 59 साल बाद यह अद्भुत खगोलीय घटना 26 सितम्बर को साफ तौर पर देखी जा सकेगी। आसमान में इस अद्भुत नजारे का प्रेक्षण उदयपुर के बीएन विवि के भौतिक विभाग के वैज्ञानिकों द्वारा लिया जाएगा।
चमकदार तारे की तरह दिखेगा बृहस्पति
बीएन विवि के भौतिक विभागाध्यक्ष डॉ. देवेंद्र पारीक के अनुसार बृहस्पति ग्रह सूर्य की परिक्रमा करने में 4333 दिन का समय लगाता है, इसका अर्थ है कि यह 12 साल में एक बार सूूर्य की परिक्रमा को पूर्ण करता है। वहीं, बृहस्पति ग्रह हर 13 महीने बाद एक बार पृथ्वी के पास होता है परंतु 26 सितम्बर को होने वाली घटना दुर्लभ है क्योंकि 59 वर्षों में पहली बार ऐसा हो रहा है जब पृथ्वी और बृहस्पति ग्रह एक-दूसरे के बेहद करीब होंगे। इस घटना की वजह से बृहस्पति ग्रह चमकदार तारे की तरह दिखाई देगा। इसी दौरान बृहस्पति ग्रह सूरज से ठीक उल्टी दिशा में होगा और यह ग्रह पृथ्वी से भी दिखाई देगा। सूर्य के ठीक उल्टी दिशा में होने को वैज्ञानिक भाषा में अपोजिशन कहते हैं। यह एक सामान्य प्रक्रिया है।
घटना के लिए जाएंगे प्रेक्षण और निकालेंगे निष्कर्ष
डॉ. पारीक ने बताया कि सबसे नजदीक होने पर बृहस्पति ग्रह 590 मिलियन किमी. पृथ्वी से दूर रहेगा। वहीं, सबसे अधिक दूर होने पर इसकी दूरी 960 मिलियन किमी. होती है। बृहस्पति का पृथ्वी के इतने नजदीक आने के कारण पृथ्वी सतह पर द्वितीयक विकिरणों की मात्रा में बदलाव आ सकता है। इसलिए प्रेक्षण 22 सितंबर से शुरू कर दिए गए हैं और 7 अक्टूबर तक प्रेक्षण लिए जाएंगे। 26 सितम्बर को भी प्रेक्षण लिए जाएंगे । तुलनात्मक अध्ययन के बाद तथा आंकडों का विश्लेषण करने के बाद विकिरणों में संभावित परिवर्तनों के बारे में किसी वैज्ञानिक निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकेगा।
Published on:
25 Sept 2022 06:00 pm
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