
उदयपुर. ज्येष्ठ मास या जेठ का महीना शुरू हो चुका है। शास्त्रों में ज्येष्ठ मास का काफी अधिक महत्व है क्योंकि इस मास में सबसे बड़े दिन होते हैं। हिंदी पंचांग के मुताबिक ज्येष्ठ के महीने को तीसरा महीना माना जाता है। इस महीने में जहां सूर्य का प्रकोप काफी बढ़ जाता है। वहीं सूर्य देव और वरुण देव की पूजा करने का खास लाभ मिलता है।
पं.नीलेश शास्त्री के अनुसार मान्यता ये है कि इसी महीने में भगवान श्रीराम की भेंट उनके परम् भक्त हनुमान जी से हुई थी। इसी वजह से इस माह में भगवान बजरंगबली की पूजा करने का विधान है। ज्येष्ठ मास का समापन 4 जून रविवार को होगा। इस दौरान कई पर्व व व्रत इस मास में पड़ेंगे। इसमें गंगा दशहरा, निर्जला एकादशी जैसे पर्व हैं, जो इस माह में जल का महत्व बताते हैं। साथ ही सूर्य पूजा, दान-ध्यान और मंत्र जाप का विशेष महत्व होता है। शास्त्री ने बताया कि जेष्ठ मास में ज्येष्ठ पुत्र-पुत्री का विवाह, मुंडन संस्कार, ग्रह प्रवेश आदि नहीं किया जाता। ज्योतिष शास्त्र लोक परंपरा के अनुसार ज्येष्ठ मास को ज्येष्ठ पुत्र-पुत्री के लिए शुभ कार्य करना श्रेष्ठ नहीं बताया गया है।
● 15 मई : वृषभ सक्रांति अपरा एकादशी व्रत
● 17 मई : प्रदोष व्रत
● 19 मई : वट सावित्री व्रत, ज्येष्ठ अमावस्या, शनि जयंती
22 मई : महाराणा प्रताप जयंती
● 25 मई : गुरु पुष्य नक्षत्र, नौतपा आरंभ
● 28 मई : धूमावती जयंती
● 29 मई : महेश नवमी
● 30 मई : गंगा दशहरा
● 31 मई : निर्जला एकादशी व्रत
● 1 जून : प्रदोष व्रत
● 2 जून : नौ तपा समाप्त
यह भी पढ़ें : रणथम्भौर के खूंखार बाघ टी-104 को किया उदयपुर शिफ्ट
● 3 जून : ज्येष्ठ पूर्णिमा, वट पूर्णिमा
इस महीने विवाह के शुभ मुहूर्त : मई : 10, 11, 12, 16, 21, 22, 26, 27, 28, 29, 30, 31
जून : 1, 3, 4
Updated on:
09 May 2023 06:47 pm
Published on:
09 May 2023 11:55 am
बड़ी खबरें
View Allउदयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
