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झीलों के संरक्षण के कामकाज की रफ्तार में राजस्थान से आगे कर्नाटक

झीलों के संरक्षण एवं संवद्र्धन को लेकर राजस्थान धीमी गति से चल रहा है। दिन ब दिन बढ़ते शहरीकरण के साथ ही झीलों और छोटे तालाबों के अस्तित्व पर संकट बढ़ता ही जा रहा है। झीलों के संरक्षण को लेकर राजस्थान झील विकास प्राधिकरण का गठन कर दिया गया, इसके बावजूद झीलों के विकास एवं संवद्र्धन पर अभी तेजी से काम नहीं हो पाया।

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pichola lake udaipur

pichola lake udaipur

मुकेश हिंगड़

उदयपुर. राजस्थान की झीलों की तस्वीर अभी धुंधली ही है, लेकिन अगर कर्नाटक की बात करें तो वहां भी प्राधिकरण बनने के साथ ही झीलों के प्लान पर काम तेजी से आगे चरणबद्ध तरीके से बढ़ रहा है। इधर, जोधपुर हाईकोर्ट में कंवराजसिंह व अन्य बनाम राजस्थान राज्य, अन्य एवं स्वप्रेरणा से दर्ज याचिका में सुनवाई में भी कोर्ट ने सरकार को कई निर्देश भी दिए हैं, जो यहां यूआईटी को मिल गए है।

कर्नाटक इस तेजी से बढ़ रहा आगे
- सभी झीलों को चिन्हित किया एवं सीमाओं का निर्धारण किया गया।

- झीलों के जल भराव क्षेत्र, पाल व केचमेंट एरिया के 30 मीटर की परिधि में किसी भी प्रकार के अवैध निर्माण व कब्जे के नियमन की कार्यवाही पर रोक लगाई
- झीलों के संरक्षण का प्लान डीपीआर सहित तैयार करने के निर्देश प्राधिकरण को दे दिए

- झीलों के संरक्षण के लिए अलग से विशेष प्रावधान राज्य बजट में किया जाकर प्राधिकरण को अनुदानित किया गया।
- प्रत्येक झील के संरक्षण के लिए एक लेक वार्डन को नियुक्त किया गया।


राजस्थान में अभी बहुत कुछ करना है

- झील प्राधिकरण अधिनियम 2015 लागू होने के बाद से अब तक राजस्थान की झीलों का सर्वे कर चिन्हित भी नहीं किया गया। मात्र उदयपुर की पिछोला, फतहसागर झील, जयपुर की मानसागर झील, अजमेर की अनासागर झील, डूंगरपुर की गेपसागर झील को राजपत्र में अधिसूचित करते हुए झील के रूप में घोषित जरूर किया।
- जैसलमेर की गडसीसर झील को न्यायालय के आदेशों से वर्तमान जनहित याचिका के अधीन घोषित किया गया है तो जोधपुर की सूरसागर झील व जयपुर की सांभर झील को राष्ट्रीय हरित प्राधिकारण के आदेशों के परिप्रेक्ष्य में झील घोषित किया गया है।

- झीलों के संरक्षण एवं संवद्र्धन के लिए कोई विस्तृत प्लान नहीं बनाया गया
- झील की परिधि में निर्माण पर सख्ती से रोक की पालना नहीं


हाईकोर्ट का डंडा, राजस्थान सरकार यह सब करें

- जिला स्तरीय झील संरक्षण समिति अपने जिलों में स्थित झीलों का सर्वे कर झील का रक्षित क्षेत्र व जल भराव क्षेत्र को चिन्हित करें
- चिन्हित करने के बाद प्रस्ताव बनाकर राजस्थान झील विकास प्राधिकरण को छह महीने में भेजने और झील के संरक्षण का प्लान बनाकर आगामी तीन माह में तैयार कर प्राधिकरण को भेजा जाए

- प्राधिकरण द्वारा झील घोषित करने का प्रस्ताव प्राप्त होने पर राज्य सरकार के विचारार्थ आगामी चार सप्ताह में भेजने और राज्य सरकार उसके पश्चात झील घोषित किये जाने की अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित करे।
- झीलों के विकास, संरक्षण एवं बचाव के लिए तैयार किए गए प्लान पर प्राधिकरण द्वारा विचार किया जाकर आगामी दो माह में राज्य सरकार को वित्तिय स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।

- झीलों के संरक्षण एवं विकास के लिए अलग से बजट में प्रावधान किया जाकर अनुदानित किया जाए
- झीलों के 30 मीटर की परिधि में निर्माण से निरुद्ध किया गया है और इस परिधि में निर्माण व कब्जे के नियमन की अनुमति नहीं दिए जाने के लिए पाबंद किया गया है।

(उच्च न्यायालय के 29 सितंबरख् 2021 को जारी किए, ये आदेश उदयपुर यूआईटी को भी मिले)
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इनका कहना है.....

हमने न्यायालय में दलील पेश कर कहा कि राजस्थान झील ( संरक्षण एवं विकास ) प्राधिकरण अधिनियम 2015 प्रभाव में आने के बाद राज्य की समस्त झीलें, जिनमें उदयपुर की पिछोला, फतहसागर, उदयसागर, गोवर्धन सागर झील एवं बड़ी आदि केजल भराव क्षेत्र, पाल व केचमेंट एरिया अधिनियम की धारा 3 के तहत राज्य सरकार में निहित हो गई है, इससे अब किसी भी स्थानीय एजेंसी का हक नहीं होगा।
- मानस रणछोड़ खत्री (याचिकाकर्ता के अधिवक्ता)