
कार्तिक पूर्णिमा के दिन दीप दान का विशेष महत्व होता है। जगदीश मंदिर के पुजारी रामगोपाल ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा पर भगवान जगदीश को सफेद जरी की पौशाक व टोपी मुकुट धारण करवाया गया।

मंदिर में भजन कीर्तन हुए जो शाम तक रहे। कार्तिक स्नान करने वालो ने शाम को गणगौर घाट पर पूजा अर्चना कर दीपदान किया गया।

इस दौरान 32 दीपक लगाए गए व दीपदान किया। दीपदान करने वालों का गणगौर घाट पर तांता लगा रहा। शाम को महिलाएं गीत गाती घाट पर पहुंची व दीपदान किया।

इस अवसर पर कागज की, गत्ते की व लकड़ी की नाव बनाकर उसमें दीप जलाकर झील में दीपदान किया गया। इस अवसर पर कुछ लोगों ने कागज के दोने में दीपक जलाकर भी दीपदान किया ।

इसके बाद मंदिरों में दीपदान किया गया। इसके साथ ही कार्तिक पूर्णिमा के व्रत का समापन हुआ।