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बेर, पलाश, पीपल व बरगद पर रहने वाला यह कीट बढ़ाएगा किसानों की आय

लाख कीट के आनुवंशिक संरक्षण पर मंथन

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बेर, पलाश, पीपल व बरगद पर रहने वाला यह कीट बढ़ाएगा किसानों की आय

उदयपुर . भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ओर से एमपीयूएटी के संघटक आरसीए, कीट विज्ञान विभाग में लाख कीट आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण पर प्रसार परियोजना की छठी समन्वय समिति की बैठक और कार्यशाला शुरू हुई।


मुख्य अतिथि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सहायक महानिदेशक डॉ. के.के. सिंह ने कहा कि लाख की परियोजना में अधिक से अधिक किसानों को प्रशिक्षण देकर लाख की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा ताकि वो अपनी आमदनी को बढ़ा सके। कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतीय प्राकृतिक लाख एवं गोंद परियोजना के निदेशक डॉ. के.के. शर्मा ने कहा कि 30-40 वर्षों पूर्व हमारे देश में लाख की खेती पूरे भारतवर्ष में की जाती थी, लेकिन धीरे-धीरे इसके कम उपयोग के कारण इसकी खेती पर अधिक ध्यान नहीं दिया गया। वर्ष 2013-14 में पुन: इसके महत्व एवं उपयोगिता को देखते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने इस परियोजना की शुरुआत की। आज लाख की खेती में भारत प्रथम स्थान पर है और पूरे देश में 20 मैट्रिक टन लाख का उत्पादन हो रहा है। इस परियोजना से जुड़े सभी अनुसंधान केन्द्र इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि लाख का सर्वाधिक उपयोग राजस्थान में होता है।

विशिष्ट अतिथि एमपीयूएटी के अनुसंधान निदेशक डॉ. अभय कुमार मेहता ने कहा कि भारतीय संस्कृति में लाख की धार्मिक महत्ता को बताते हुए कहा कि आज भी लडक़ी की शादी में लाख की चूडिय़ों को पहनाना शुभ माना जाता है। किसानों की आर्थिक दशा सुधारने में लाख की खेती अपना अहम योगदान दे सकती है क्योंकि एक कुसुम पौधे से 50 किलो ग्राम तथा बेर के पौधे से 10 किलो ग्राम लाख का प्रतिवर्ष उत्पादन होता है।

डॉ. एस.के. शर्मा ने कहा कि लाख की खेती की काफी संभावना है, इसके लिए बेर, पलाश, पीपल तथा बरगद के पेड़ उपयुक्त है, लेकिन इसके लिए कीटों का संरक्षण बहुत ही महत्वपूर्ण है। लाख कीटों की पहचान कर उनका बहुलीकरण करना एक महत्वपूर्ण अनुसंधान कार्य है। लाख कीट प्रौद्योगिकी के माध्यम से किसान अपनी आय को बढ़ा सकते हैं। डॉ. अरूणाभ जोशी ने कहा कि लाख का हमारे जीवन में प्राचीन समय से ही काफी महत्व है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में विभिन्न रंगों की लाख पायी जाती है। आज भी ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं लाख की चूडिय़ाँ पहनने का प्रचलन है।

कार्यक्रम सचिव एवं परियोजना प्रभारी डॉ. हेमन्त स्वामी ने बताया कि इस दो दिवसीय कार्यशाला में लाख परियोजना के 8 केन्द्रों गुजरात, हरियाणा, राजस्थान, जम्मू, मणिपुर, आसाम, केरल, उत्तराखण्ड, मध्यप्रदेश तथा दादर एवं नागर हवेली के लाख कीट परियोजना से जुड़े अनुसंधान के 35 वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं। डॉ. स्वामी ने बताया कि इस दो दिवसीय कार्यशाला के दौरान अनुसंधान प्रगति का प्रतिवेदन प्रस्तुत कर विगत वर्षों की प्रगति का विश्लेषण किया जाएगा साथ ही लाख कीट के संवर्धन एवं संरक्षण का विश्लेषण एवं मंथन किया जाएगा।
डॉ. हेमन्त स्वामी ने बताया कि राजस्थान कृषि महाविद्यालय के कीट विज्ञान विभाग के लाख कीट संग्रहालय एवं प्रयोगशाला तथा लाख कीट जीन बैंक का विभिन्न राज्यों के वैज्ञानिकों ने अवलोकन किया एवं सभी वैज्ञानिकों ने महाविद्यालय में स्थापित प्रयोगशाला एवं जीन बैंक की प्रशंसा की। इस अवसर पर अतिथियों द्वारा डॉ. हेमन्त स्वामी एवं डॉ. लेखा का संकलित तकनीकी पुस्तिक पश्चिमी शुष्क प्रभाग में लाख कीट एवं पोषक वृक्ष की परिस्थिति का विमोचन भी किया गया।