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भावनाओं, विचारों, इच्छाओं को व्यक्त करने में मदद करती भाषा

भाषाविद् प्रो. केके शर्मा से बातचीत

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भावनाओं, विचारों, इच्छाओं को व्यक्त करने में मदद करती भाषा

भावनाओं, विचारों, इच्छाओं को व्यक्त करने में मदद करती भाषा

भाषा वह ज्ञान और क्षमता है, जो हमें एक-दूसरे के साथ संवाद करने की अनुमति देती है। भाषा विज्ञान ज्ञान प्रणालियों का अध्ययन है। भाषा मनुष्यों को भावनाओं, विचारों, इच्छाओं आदि को व्यक्त करने में मदद करती है। भाषाविद् सभी मानव भाषाओं में सामान्य गुण, भाषाएं कैसे भिन्न हैं, पैटर्न में भिन्नता आदि जैसे सवालों के जवाब तलाशते हैं। बच्चों के साथ यह पता लगाने के लिए भी काम करते हैं कि बच्चे छोटी उम्र में कम समय में किसी भाषा का संपूर्ण ज्ञान कैसे प्राप्त कर लेते हैं। ये बात भाषाविद् प्रो. कृष्णकुमार शर्मा ने कही। पेश है प्रो. शर्मा से बातचीत के अंश।

देश में हिंदी की स्थिति के बारे में क्या कहेंगे?

- हिंदी भाषा की स्थिति को देखकर मन में पीड़ा होती है। दुनिया में शायद ही भारत जैसा देश होगा, जिसमें इतनी भाषाएं बोली जाती है। हमारे संविधान की अष्टम अनुसूची में 22 भाषाएं शामिल है। इनमें हिंदी राजभाषा है।

राजभाषा की स्थिति अच्छी नहीं होने का क्या कारण है?

- खेद की बात है कि जिन राज्यों में हिंदी राजभाषा मान्य है। उन राज्यों में भी सारे राजकार्य हिंदी में नहीं होते। आदेश, परिपत्र आदि अंग्रेजी में लिखे जाते हैं। दक्षिण भारतीय राज्यों की अपनी राजभाषाएं हैं। उन राज्य का अपना मोह है।

प्रदेश में अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के बारे में क्या कहेंगे?

- मैं अंग्रेजी का विरोध नहीं करता, लेकिन अंग्रेजी में ही पढऩा और हिंदी की उपेक्षा करना ठीक नहीं। अंग्रेजी में निष्णात हों, लेकिन अपने देश की भाषा का सम्मान करना चाहिए। अभिभावकों को चाहिए कि बच्चों को अंग्रेजी में दक्ष बनाएं, लेकिन देश की संस्कृति का सम्मान करना भी सिखाएं। राष्ट्र भाषा के प्रति गौरव सिखाएं।

आजकल स्कूलों में जिस तरह हिंदी पढ़ाई जाती है, वह कैसी प्रतीत होती है?

- वस्तुनिष्ठ प्रश्नों की परीक्षा पद्धति से शिक्षक भर्ती परीक्षाओं से चयन होता है, बेहद गलत है। अध्यापक एकवचन और बहुवचन के प्रयोग में अनुस्वार के प्रयोग ना तो खुद जानते हैं और ना ही बच्चों को सिखाते हैं।

आपके नाम के साथ भाषाविद् लिखा जाता है, क्या अर्थ है इसका?

- दरअसल, ये भाषा तत्वविद् शब्द है। अर्थात भाषा के तत्व को जानने वाला। भाषा का निर्माण या रचना कैसे की गई है।

भाषा में शैली का महत्व है, शैली वैज्ञानिक कैसे होते हैं?

- शैली विज्ञान, भाषा विज्ञान की प्रयोगात्मक शाखा है। यह शब्द और अर्थ में रचे साहित्य का वस्तुनिष्ठ विवेचन करता है, जो पूरी तरह से भाषानिष्ठ होता है। ना इसमें मनोविज्ञान की जरुरत है और ना अन्य किसी शास्त्र की। साहित्य को भाषा के प्रयोग के आधार पर समझा जाता है। यह साहित्य को समझने की विधि है। वर्तमान में शैली विज्ञान केवल पढऩे की चीज रह गया है।

साहित्य में आलोचना का क्या प्रभाव है?

- अब साहित्य की आलोचना किसी सिद्धांत के आधार पर नहीं की जाती। आलोचक मनमाने तरीके से आलोचना लिख देते हैं।

परिचय

5 फरवरी 1934 को जयपुर में जन्मे, पले-बढ़े प्रो. शर्मा के पिता भी हिंदी के प्रोफेसर थे। राजस्थान विवि से पीएचडी और इलाहबाद विवि से डी-लीट किया। उदयपुर विश्वविद्यालय के अलावा जम्मू, आंध्र, आगरा में अध्यापन किया। आगरा के केंद्रीय हिंदी संस्थान में प्रोफेसर रहे। यह संस्थान देशभर में हिंदी शिक्षकों को वैज्ञानिक विधि से हिंदी पढ़ाने का काम करता है। प्रो. शर्मा ने हिंदी व्याकरण शिक्षक के लिए एमपी सरकार की ओर से तीन पुस्तकें लिखी। ध्वनि विज्ञान पर एक और शैली विज्ञान के सिद्धांत पर 5 पुस्तकें लिखी। वर्तमान में चयन समितियों, पुरस्कार समितियों में भूमिका निभाते हैं।